बलराम यादव
पाटन। दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक ग्राम तरीघाट का प्राचीन इतिहास धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। करीब 15 वर्ष पूर्व भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा यहां कराई गई खुदाई में एक विकसित प्राचीन नगर और व्यापारिक केंद्र के प्रमाण मिले थे, लेकिन खुदाई से प्राप्त बहुमूल्य अवशेषों का वर्तमान में कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2010-11 में पुरातत्व विभाग ने तरीघाट में विस्तृत उत्खनन कार्य कराया था। खुदाई के दौरान प्राचीन सिक्के, मूर्तियां, कौड़ियां, धान के अवशेष, मिट्टी के पात्र और अन्य ऐतिहासिक सामग्री प्राप्त हुई थी। इन अवशेषों के आधार पर विशेषज्ञों ने संभावना जताई थी कि खारुन नदी के तट पर कभी एक समृद्ध नगर बसा हुआ था, जो व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।
इतिहासकारों का मानना है कि नदी के किनारे स्थित होने के कारण उस समय जल मार्ग का उपयोग व्यापार और आवागमन के लिए किया जाता रहा होगा। खुदाई में मिले अवशेषों से इस क्षेत्र का संबंध कल्चुरी कालीन सभ्यता से भी जोड़ा गया था। इससे तरीघाट का महत्व केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में इसकी पहचान बनने लगी थी।
दूर-दूर से आते थे लोग
खुदाई के बाद प्राप्त सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए ग्राम में एक संग्रहालय का निर्माण किया गया था। कुछ समय तक यहां मिले अवशेषों को प्रदर्शित भी किया गया, जिन्हें देखने के लिए आसपास के जिलों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग पहुंचते थे। इससे ग्रामीणों को उम्मीद थी कि आने वाले समय में तरीघाट पर्यटन और ऐतिहासिक अध्ययन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
अब संग्रहालय खाली, अवशेषों का नहीं मिल रहा पता
ग्राम के पूर्व सरपंच अशोक साहू ने बताया कि खुदाई में मिले अवशेषों को बाद में बाबा गुरु घासीदास संग्रहालय में सुरक्षित रखने के लिए भेजा गया था। लेकिन वर्तमान में न तो तरीघाट स्थित संग्रहालय में वे सामग्री मौजूद है और न ही बाबा गुरु घासीदास संग्रहालय में उनके संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी मिल पा रही है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में चार से पांच बार लिखित शिकायत एसडीएम पाटन को दी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई या जांच नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने इस गंभीर विषय को लेकर अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी नहीं सुनी गई शिकायत
ग्रामीणों के अनुसार मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज कराने का प्रयास भी किया गया, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं हो सकी। इससे लोगों में और अधिक नाराजगी व्याप्त है। उनका कहना है कि करोड़ों वर्षों के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अवशेषों का इस प्रकार गायब हो जाना गंभीर चिंता का विषय है।
जांच और संरक्षण की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि पुरातत्व विभाग, जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग संयुक्त रूप से मामले की जांच कर यह स्पष्ट करें कि खुदाई में प्राप्त ऐतिहासिक सामग्री वर्तमान में कहां सुरक्षित है। साथ ही तरीघाट के संग्रहालय को पुनः विकसित कर वहां प्राप्त पुरातात्विक धरोहरों को प्रदर्शित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में गंभीर पहल नहीं की गई, तो खारुन नदी के तट पर बसे प्राचीन सभ्यता और व्यापारिक नगर के महत्वपूर्ण साक्ष्य हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में खो जाएंगे।






