एक शिक्षक छात्रों के लिए अनुकरणीय होता है, लेकिन एक ऐसा शिक्षक जो शिक्षकों के लिए भी अनुकरणीय हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। जी हां ,मैं आपको बताना चाहूंगी एक दृढ़ निश्चयी, ऊर्जावान , समर्पित शिक्षिका श्रीमती किरण बाला वर्मा जी,सेवा निवृत प्राचार्य ,शासकीय उ .मा.वि .घुघुवा(क) पाटन,जिला दुर्ग के बारे में। मैंने जब अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत की तब मुझे सानिध्य मिला वर्मा मैडम का ।उन्होंने मुझे इस वाक्य के साथ कर्तव्यबोध कराया कि ग्रामीण बच्चों के लिए एक शिक्षक उनके जीवन की दिशा एवं दशा बदलने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।इसलिए हमें अपनी शिक्षक होने की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभानी चाहिए।क्योंकि ये छात्र न केवल राष्ट्र ,समाज के भविष्य है ,साथ ही आने वाली पीढ़ियां भी इनकी शिक्षा पर निर्भर करता है। उन्होंने अपने विद्यालय में अध्यनरत हर बच्चे की मदद की, चाहे वह आर्थिक सहायता देकर या मानसिक संबल देकर, उन्हें जीवन में कुछ ना कुछ बनने की प्रेरणा दी। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में रचनात्मक, सृजनात्मक तो होती है, लेकिन उन्हें पर्याप्त संसाधन ,अवसर नहीं मिल पाता, जिसके कारण बच्चे अपने हुनर को आकर नहीं दे पाते हैं ।ऐसे बच्चों को मैडम अपने खर्चे से सामग्रियां उपलब्ध कराकर उन्हें पेंटिंग ,ड्राइंग, शिल्प कला ,मिट्टी कला आदि के लिए प्रोत्साहित करती ।वे स्वयं भी बहुत ही रचनात्मक हैं। मैंने उनसे सीखा की किस तरह हम कहानियों के माध्यम से या दैनिक जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को पाठ्य वस्तु से जोड़कर शिक्षण अधिगम (सीखने सिखाने )की प्रक्रिया को सरल बना सकते हैं। उनके अंदर हमेशा एक युवा की भांति कुछ नया करने का जोश भरा रहता है ।तथा अपने साथी शिक्षकों में भी उत्साह भरने में वह हमेशा तत्पर रहती हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन छात्रों को समर्पित रहा है। ग्रामीण परिवेश से जुड़े होने के कारण वह हमेशा ग्रामीण छात्रों की आवश्यकताओं को न केवल बखूबी समझती बल्कि उन्हें पूरा करने में भी आज भी जुटी रहती हैं। आज तक कई विद्यार्थियों का जीवन संवारने में उनकी महती भूमिका रही है, इसके साक्षी न केवल आसपास के क्षेत्र के सारे छात्र हैं, जो उनके विद्यालय में पढ़ाई किए हैं, अपितु वे सभी शिक्षक भी हैं जो उनके संपर्क में आए हैं। मैडम दूसरों को उपदेश देकर सीखने के बजाय, स्वयं करके उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करती हैं । वे विद्यालय में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन करवाती, जिससे छात्रों का न केवल व्यक्तित्व विकास हो अपितु सर्वांगीण विकास हो सके। मैडम थक कर हार मान जाने वालों में से नहीं ,बल्कि दृढ़ निश्चयी,लगनशील शील है। सबके लिए उनके हृदय में अथाह प्रेम भरा है ।उनसे मिलने भर से ही, मैं अपने आप को रोमांचित और गौरवान्वित महसूस करती हूं , मैं हृदय की गहराइयों से किरण बाला वर्मा मैडम की आभारी हूं,कि मुझे उनका सानिध्य मिला जिनका संपूर्ण व्यक्तित्व आज भी मेरे जीवन का पथ प्रदर्शन करता है। आज न केवल शिक्षक दिवस के अवसर पर अपितु हर दिन मेरी प्रेरणा स्रोत के रूप में मैं उन्हें याद करती हूं, और आज भी उनसे सीखती रहती हूं।

( आलेख जैसा की श्रीमती अन्नपूर्णा यादव ने सीजी मितान को भेजा है)








