राज्य शैक्षिक अनुसंधान संस्थान, समग्र शिक्षा राज्य कार्यालय एवं अह्वान संस्थान के संयुक्त प्रयास से जिले में बालवाड़ी कार्यक्रम संचालित हो रही है। इसी तारतम्य में
जेंडर आधारित शिक्षण, समावेशी शिक्षा एवं बालिका शिक्षा को कक्षा शिक्षण से जोड़ने पर हुआ मंथन हुआ।

धमधा (जिला दुर्ग,
छत्तीसगढ़)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप विद्यालयों में समानता आधारित एवं समावेशी शिक्षण वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड में शिक्षकों की एक दिवसीय प्रशिक्षण सह क्षमता संवर्धन बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन विकासखंड स्रोत केंद्र (BRC), धमधा में किया गया, जिसमें विकासखंड के समस्त शिक्षकों ने सहभागिता की।

बैठक का नेतृत्व विकासखंड स्रोत समन्वयक श्री केशव प्रसाद पटेल ने किया। इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री अथर्व शर्मा, लेखापाल श्री प्रवीण मिश्रा, अह्वान संस्थान से सुश्री शीतल मोटघरे एवं श्री प्रदीप शर्मा सहित विकासखंड के शिक्षक उपस्थित रहे।
जेंडर आधारित शिक्षण और बालिका शिक्षा पर विशेष जोर
बैठक में विकासखंड स्रोत समन्वयक श्री केशव प्रसाद पटेल ने जेंडर आधारित शिक्षण, समावेशी शिक्षा एवं बालिका शिक्षा के महत्व पर विस्तार से अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में प्रत्येक बच्चे को बिना किसी भेदभाव के सीखने और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। इसके लिए शिक्षकों को अपनी शिक्षण पद्धति में जेंडर संवेदनशीलता एवं समावेशी दृष्टिकोण को शामिल करना आवश्यक है।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कक्षा में बालक और बालिकाओं के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। खेलकूद, समूह कार्य, प्रश्न पूछने, नेतृत्व करने और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में सभी बच्चों को समान अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और उनमें आत्मविश्वास विकसित करना विद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कक्षा शिक्षण में कैसे लागू होंगी समानता आधारित गतिविधियां?
प्रशिक्षण के दौरान केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहते हुए इस बात पर विस्तृत संवाद किया गया कि जेंडर आधारित शिक्षण एवं समावेशी शिक्षा को विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों में किस प्रकार लागू किया जा सकता है।
शिक्षकों के साथ चर्चा की गई कि कक्षा में बैठने की व्यवस्था, समूह निर्माण, खेल गतिविधियों, शिक्षण सामग्री के उपयोग, कहानियों एवं उदाहरणों के माध्यम से बच्चों में समानता और सहयोग की भावना कैसे विकसित की जा सकती है।
साथ ही शिक्षकों को अपनी कक्षा की गतिविधियों का विश्लेषण करने तथा यह समझने के लिए प्रेरित किया गया कि कहीं अनजाने में बालक एवं बालिकाओं के साथ अलग-अलग व्यवहार तो नहीं किया जा रहा है।
पालकों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा
बैठक में इस बात पर भी विशेष चर्चा हुई कि जेंडर समानता एवं बालिका शिक्षा के प्रयास केवल विद्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि परिवार और समुदाय तक भी पहुंचें।
इसके लिए पालक-शिक्षक बैठकों (PTM) में इन विषयों को शामिल करने, पालकों के साथ संवाद स्थापित करने तथा बालिकाओं की शिक्षा, नियमित उपस्थिति और घर में सीखने के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए जागरूक करने पर चर्चा की गई।
शिक्षकों ने इस बात पर विचार साझा किए कि पालकों को विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़कर बच्चों की शिक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।
पीपीटी एवं वीडियो के माध्यम से ‘तमन्ना’ की केस स्टोरी पर संवाद
प्रशिक्षण के दौरान पीपीटी प्रस्तुतीकरण एवं वीडियो के माध्यम से ‘तमन्ना’ की केस स्टोरी साझा की गई। इस केस स्टोरी के जरिए बच्चों की शिक्षा, अवसरों में समानता, सामाजिक सोच और बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर संवाद किया गया।
प्रतिभागियों ने केस स्टोरी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए विचार किया कि ऐसी परिस्थितियों में शिक्षक की भूमिका क्या होनी चाहिए और विद्यालय किस प्रकार बालिकाओं को आगे बढ़ने के लिए सहयोगी एवं सुरक्षित वातावरण प्रदान कर सकता है।
इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षकों को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर जेंडर संवेदनशीलता और समावेशी दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिला।
विद्यालयों में बेहतर क्रियान्वयन के लिए बनी कार्ययोजना
बैठक के अंत में प्रशिक्षण में हुई चर्चा को विद्यालय स्तर पर लागू करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया। शिक्षकों ने अपनी-अपनी कक्षाओं में जेंडर समानता आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने, बालिकाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने, समावेशी शिक्षण पद्धतियों को अपनाने तथा पालकों के साथ नियमित संवाद स्थापित करने की दिशा में कार्य करने पर चर्चा की।
बैठक का उद्देश्य शिक्षकों को केवल विषय की जानकारी देना नहीं, बल्कि उनके व्यवहार एवं दैनिक शिक्षण प्रक्रिया में सकारात्मक बदलाव लाना रहा, ताकि प्रत्येक बच्चा विद्यालय में सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर के साथ सीख सके।
यह प्रशिक्षण धमधा विकासखंड के विद्यालयों में जेंडर संवेदनशील एवं समावेशी शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू करने तथा बालिकाओं की शिक्षा और सहभागिता को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।
शिक्षा में समानता तभी संभव है, जब कक्षा में प्रत्येक बच्चे को समान अवसर, सम्मान और अपनी प्रतिभा विकसित करने का पूरा अधिकार मिले।






