पाटन ब्लॉक के बोदल गांव का मामला, शिकायत और जांच के बाद भी कार्रवाई शून्य; राजस्व विभाग और पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल

पाटन। पाटन ब्लॉक के ग्राम बोदल में रास्ते और जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई की अनदेखी को लेकर चर्चा में है। आवेदक की शिकायत पर जांच हुई, न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार पाटन ने आदेश भी जारी किया और संबंधित पक्षों को सात दिन के भीतर कथित अनाधिकृत कब्जा हटाने का प्रमाण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद, शिकायतकर्ता के आरोपों के अनुसार, विवादित निर्माण पर कार्रवाई नहीं हुई है और आज भवन की छत ढलाई का काम किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब राजस्व न्यायालय से आदेश जारी हो चुका है, तो मौके पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
शिकायत के बाद जांच, फिर जारी हुआ आदेश
न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार पाटन के प्रकरण क्रमांक 202510104500069 से संबंधित उपलब्ध आदेश में ग्राम बोदल निवासी दिनेश कुमार नागे, पिता चंद्रिका प्रसाद नागे की शिकायत का उल्लेख है। शिकायत में आवास तक आने-जाने के रास्ते पर कथित रूप से कब्जा किए जाने तथा आवागमन में बाधा उत्पन्न होने की बात कही गई थी।

आदेश में पटवारी प्रतिवेदन का हवाला देते हुए खसरा नंबर 277 की 0.14 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख किया गया है, जिसे राजस्व अभिलेख में मद घास के रूप में दर्ज बताया गया है। प्रतिवेदन के अनुसार, उक्त भूमि पर मकान निर्माण कर निवास किया जा रहा है। वहीं, आवेदक की भूमि और मकान तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर भी विवाद सामने आया है।
सात दिन में प्रमाण प्रस्तुत करने का निर्देश
न्यायालयीन आदेश में संबंधित पक्षों को सात दिनों के भीतर कथित अनाधिकृत कब्जा हटाए जाने का प्रमाण हल्का पटवारी के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई नहीं होने पर ग्राम पंचायत बोदल के माध्यम से छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 56 के अंतर्गत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। कब्जा हटाने के बाद भूमि को मूल स्वरूप में लाने में होने वाले खर्च की वसूली का भी उल्लेख किया गया है।
आदेश के बाद भी निर्माण जारी होने का आरोप
आवेदक पक्ष का आरोप है कि आदेश जारी होने के बावजूद विवादित स्थल पर निर्माण कार्य जारी है। शिकायत के अनुसार, आज भवन की छत ढलाई की जा रही है। यदि मौके पर निर्माण जारी है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि संबंधित अधिकारियों ने आदेश के पालन और स्थल की स्थिति की निगरानी के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।
मामले में राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, निर्माण की वर्तमान स्थिति, आदेश की तामिली और संबंधित विभागों की ओर से की गई कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब देखना होगा कि राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत बोदल इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या न्यायालयीन आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा या विवादित निर्माण आगे भी जारी रहेगा? फिलहाल, आवेदक को राहत मिलने और रास्ते से संबंधित विवाद का समाधान होने के लिए प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।






