पंडरिया-ब्लाक के वनांचल क्षेत्र में मौजूद तेंदू अब अंतिम चरण में हैं।तेंदू दो महीने तक पर्याप्त मात्रा के बाजार में बिकने आते रहे,अब कम मात्रा में तेंद दिखाई पड़ रहे हैं।तेंदू के फल लगभग अब झड़ चुके हैं।कुछ ही पेड़ों में तेंदू बचे हुए हैं।क्षेत्र में इसके पर्याप्त पेड़ हैं।तेंदू का लकड़ी काफी मजबूत रहता है।तेंदू एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है।जो शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है।यह शरीर के कई रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।तेंदू पाचन शक्ति मजबूत करता है।तेंदू में उच्च मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज को दूर करता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है। इसके सेवन से पेट की समस्याएं ठीक होती हैं और पेट साफ रहता है।तेंदू आंखों के लिए वरदान हैं।इसमें मौजूद विटामिन A, ल्यूटिन (Lutein) और जेक्सैन्थिन (Zeaxanthin) जैसे एंटीऑक्सीडेंट आंखों की रोशनी बढ़ाते हैं। इसके नियमित सेवन से आंखों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है– तेंदू विटामिन C का एक बेहतरीन स्रोत है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, जिससे आप मौसमी बीमारियों और संक्रमण से बचे रहते हैं।इसके अलावा शरीर को ठंडक और ऊर्जा देता है।गर्मियों के मौसम में तेंदू का सेवन शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है। इसके मीठे और पौष्टिक गुण थकान मिटाकर इंस्टेंट एनर्जी प्रदान करते हैं।तेंदू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ती उम्र के लक्षणों (झुर्रियों) को कम करते हैं। इसके गुणों से त्वचा में निखार आता है और त्वचा स्वस्थ रहती है।
दिल और शुगर के लिए फायदेमंद– तेंदू का फल नेचुरल शुगर और पोटेशियम से भरपूर होता है, जो शुगर के मरीजों के लिए एक अच्छा विकल्प है। इसके साथ ही यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
आय का प्रमुख स्रोत-तेंदू स्वास्थ्य के अलावा हर दृष्टि लाभदायक है।क्षेत्र के बैगा आदिवासी के आय का यह प्रमुख स्रोत है।गर्मी के दिनों में परिवार के सभी सदस्य पत्ते तोड़ने के कार्य के लगे होते हैं।इसके पत्ते तोड़कर आदिवासी समुदाय आय प्राप्त करते हैं।वहीं फल को बेचकर भी आय अर्जित करते हैं।







