संजय साहू

अंडा। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र अंडा से 8 कि. मी. के दूरी पर ग्राम पंचायत कातरो स्थित भरदा खार में आस्था और श्रद्धा का एक प्राचीन स्थल है, जहां जय ठाकुर देव और बजरंगबली विराजमान हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह मंदिर करीब 100 साल पुराना है। यहां महाशिवरात्रि के अवसर पर मेला लगता है, वहीं चैत्र और क्वांर नवरात्रि में ज्योति कलश प्रज्वलित कर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं।

ग्राम कातरो निवासी पदुम चंद गजपाल की लगभग एक एकड़ जमीन पर स्थित इस धार्मिक स्थल को लेकर ग्रामीणों में गहरी आस्था है। बताया जाता है कि खेत में एक सूखा बोइर का पेड़ था, जिसके नीचे से जय ठाकुर देव और बजरंगबली की प्रतिमाएं प्रकट हुई थीं। इसके बाद से ही यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया। करीब 20 वर्षों से यहां मंदिर का निर्माण कर नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जा रही है।

दोनों नवरात्रि में जलते हैं ज्योति कलश
इस मंदिर में चैत्र और क्वांर नवरात्रि के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। क्वांर नवरात्रि में यहां लगभग 130 ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं, जबकि चैत्र नवरात्रि में ज्योति कलशों की संख्या बढ़ते क्रम में रहती है। नवरात्रि के दौरान आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर लगने वाला मेला भी इस धार्मिक स्थल की विशेष पहचान है।
श्रद्धालुओं की मनोकामना से जुड़ी है आस्था
मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह मंदिर करीब 100 वर्षों से भी अधिक पुराना माना जाता है। उन्होंने बताया कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर ठाकुर देव और बजरंगबली के दरबार में पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी हो जाती है। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु सालभर यहां दर्शन करने आते हैं।

ग्राम कातरो के भरदा खार में स्थित यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक परंपरा और ग्रामीण आस्था का प्रतीक बना हुआ है। वर्षों से चली आ रही पूजा-पद्धति, दोनों नवरात्रियों में ज्योति कलश प्रज्वलन और महाशिवरात्रि के मेले के कारण इस स्थान का विशेष महत्व है।






