पास्को एक्ट के आरोपी को आजीवन सजा सुनाई, कोर्ट ने कहा ऐसा  मामला समाज, कानून और मानवता के खिलाफ गंभीर हमला” है


पाटन। दुर्ग जिले के पाटन स्थित विशेष POCSO अदालत ने 17 वर्षीय नाबालिग से रेप के मामले में आरोपी वेदप्रकाश उर्फ सागर वर्मा (24) को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उसे SC/ST एक्ट के तहत भी दोषी ठहराया है। कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि नाबालिग के खिलाफ इस प्रकार का अपराध “समाज, कानून और मानवता के खिलाफ गंभीर हमला” है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में दया दिखाना न्याय के साथ समझौता होगा। यह घटना 8 दिसंबर 2024 को दोपहर लगभग 1.10 बजे हुई थी। पीड़िता उस समय अपने घर में अकेली थी, जबकि उसकी मां आंगन में काम कर रही थी। इसी दौरान गांव का युवक वेदप्रकाश वर्मा घर में घुस गया।

हाथ-मुंह दबाकर कमरे में रेप

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता का हाथ और मुंह दबाकर उसे जबरन कमरे में ले जाकर रेप किया। जब पीड़िता ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसका गला दबाकर धमकाने का प्रयास किया। घटना के बाद पीड़िता किसी तरह बाहर भागी और अपनी मां को पूरी बात बताई।

मां को बताने के बाद आरोपी दोबारा पहुंचा

इसी बीच आरोपी वेदप्रकाश वर्मा दोबारा घटनास्थल पर पहुंचा और पीड़िता का हाथ पकड़ने की कोशिश की। हालांकि, पीड़िता की मां के बीच-बचाव करने पर वह वहां से भाग गया। परिवार ने तत्काल 112 पर कॉल कर घटना की सूचना दी। इसके बाद पाटन थाने में FIR दर्ज की गई। पुलिस जांच के दौरान, पीड़िता का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया गया। उसकी उम्र के सत्यापन के लिए जन्म प्रमाण-पत्र और स्कूल के दस्तावेज जब्त किए गए। पीड़िता और आरोपी दोनों के कपड़ों का FSL (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) परीक्षण कराया गया।।मेडिकल रिपोर्ट और जैविक नमूनों ने भी आरोपों की पुष्टि की। घटनास्थल का नक्शा और गवाहों के बयान भी अभियोजन पक्ष के समर्थन में रहे। आरोपी वेदप्रकाश वर्मा को घटना के अगले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

कोर्ट का कठोर अवलोकन “बच्चे के भविष्य और गरिमा पर सीधा हमला”

अपर सत्र न्यायाधीश और पाटन POCSO विशेष न्यायालय के पीठासीन अधिकारी दुलार सिंह निर्मलकर ने फैसले में कहा, नाबालिग पर यौन हमला केवल शारीरिक क्षति नहीं, बल्कि उसके भविष्य, गरिमा और मानसिक विकास पर गहरा आघात है।

समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर सजा आवश्यक है। यह अपराध सिर्फ पीड़िता ही नहीं, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों के खिलाफ भी है। पॉस्को एक्ट की धारा 42 के तहत अधिकतम लागू सजा दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध पीड़िता के अनुसूचित जाति वर्ग से होने की जानकारी के साथ किया गया, इसलिए SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी लागू होंगी।

फैसला- आजीवन सजा और अर्थदंड

कोर्ट ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता धारा 332 (ख)

5 वर्ष सश्रम कारावास

₹3000 अर्थदंड

अर्थदंड न देने पर 1 माह अतिरिक्त सजा

POCSO एक्ट धारा 4(1)

आजीवन सश्रम कारावास

₹5000 अर्थदंड

अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष अतिरिक्त सजा

SC/ST एक्ट धारा 3(2) (V)

आजीवन सश्रम कारावास

₹5000 अर्थदंड

अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष अतिरिक्त सजा

अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं समानांतर रूप से चलेंगी।
पीड़िता को क्षतिपूर्ति- राशि मां को दी जाएगी

न्यायालय ने निर्देश दिया कि अर्थदंड की संपूर्ण राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाए और अपील अवधि पूरी होने के बाद यह राशि उसकी मां को प्रदान की जाए।

अभियोजन का बयान – “यह फैसला बाल सुरक्षा के लिए संदेश है”

विशेष लोक अभियोजक शेखर वर्मा ने कहा, “अदालत का यह निर्णय समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि नाबालिगों से जुड़े अपराधों में कोई नरमी नहीं होगी। ऐसे मामलों में कठोर सजा ही समाधान है।”