पंडरिया।नगर सहित आस-पास के जंगलों में येलो(गोल्डन) ओरिओल चिड़िया की मनमोहक ध्वनि लोगों को आकर्षित कर रही है।इन दिनों ये बड़ी संख्या में दिखाई पड़ रहे हैं।स्थानीय भाषा मे कई जगहों पर इसे पीलक भी कहा जाता है।सुबह-सुबह नगर के वन विभाग कार्यालय,जनपद कार्यालय व आस-पास इसकी बांसुरी जैसी मधुर ध्वनि गूंजती रहती है।आम तौर पर यह एक जोड़ी में दिखाई देती है,लेकिन अभी ये दो से अधिक जोड़ों में दिखाई पड़ रहे हैं।ये पक्षी पहले नगर के आस-पास कभी-कभी ही नजर आते थे।लेकिन इस वर्ष ये बड़ी संख्या में दिखाई पड़ रहे हैं।नगर व आस-पास पिछले कुछ वर्षों में पेड़ की संख्या में भी इजाफा हुआ है।

यह नगर के आस-पास रहने वाला पक्षी है।जो बहुत ही सुंदर सिखाई देता है।देखने मे यह जितना सुंदर होता है।उससे ज्यादा मधुर इसकी आवाज लगती है।यह एक बांसुरीदार पिलो-पिलो व वीवी के सामान आवाज निकालती है।जो सुनने में बहुत ही अच्छी लगती है।इसका रंग सोने जैसा चमकता है।येलो ओरिओल को गोल्डन ओरिओल भी कहा जाता है।ये उड़ान भरने के समय पंख को ज्यादा नहीं फैलाता है।इंडियन गोल्डन ओरिओल एक मध्यम आकार का ओरिओल है, जिसकी लंबाई 23 से 26 सेमी और वजन 60 से 100 ग्राम होता है। नर ओरिओल का सिर, ऊपरी हिस्सा और निचला हिस्सा गहरे पीले रंग का होता है। पंख बड़े पीले धब्बों के साथ काले होते हैं। पीले सिरे होते हैं। ऊपरी पूंछ काली होती है व बाहरी पंखों का किनारा पीला होता है। मादा के पंख हल्के पीले रंग के होते हैं। गला, स्तन और पेट पीली और काली धारियों से सफेद होती है।ये पतझड़, सदाबहार जंगलों के अलावा बगीचों तथा नगर के आस-पास पाए जाते हैं।जंगलों के अलावा ये आम के बगीचों व नगर ल आस-पास पेड़ों पर भी रहते हैं।
पांच माह तक होता है प्रजनन काल– गोल्डन ओरिओल पक्षी के प्रजनन काल अप्रैल माह से अगस्त तक पांच माह तक होता है।इसका घोसला ज्यादा बड़े आकार का नहीं होता है।यह एक बात में दो से तीन अंडे देती है।नर और मादा दोनों घोसले बनाने व बच्चों के देखरेख में सहयोग करते हैं।
भारतीय गोल्डन ओरिओल यूरेशियन गोल्डन ओरिओल के सामान होता है।लेकिन इसका पूछ अधिक पीला होता है व चोंच लाल होता है।यह मुख्य रूप से फल, कीड़े,रस व पौधों के खाते हैं।






