12 वर्षों से केंद्र में भाजपा की सरकार, फिर लोकतंत्र बचाने की रैली क्यों? जनता के सवालों से बच नहीं सकती केंद्र सरकार – अंबिका मरकाम

लोकतंत्र केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि संविधान, नागरिक अधिकारों और जनता की आवाज का सम्मान करने की व्यवस्था है – विधायक अंबिका मरकाम

नगरी। सिंहावा,बेलरगांव।सिहावा विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि देश में पिछले 12 वर्षों से भाजपा की सरकार सत्ता में है। इसके बावजूद देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं, नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में लोकतंत्र बचाने की आवश्यकता पर सवाल उठाना जनता की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने जैसा है।

विधायक अंबिका मरकाम ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने और राजनीतिक नारे लगाने तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र की असली पहचान यह है कि देश का प्रत्येक नागरिक बिना किसी भय के अपनी बात रख सके, संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करें, विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह बनी रहे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती आई है। देश की आजादी से लेकर संविधान निर्माण और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने तक कांग्रेस का ऐतिहासिक योगदान रहा है। आज जब लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता, संवैधानिक मर्यादाओं और नागरिक अधिकारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तब कांग्रेस का लोकतंत्र बचाने के लिए आवाज उठाना पूरी तरह प्रासंगिक और आवश्यक है।

महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार से जवाब चाहती है जनता

श्रीमती मरकाम ने कहा कि आज देश का आम नागरिक महंगाई से परेशान है। खाद्य सामग्री, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च आम परिवारों के बजट पर लगातार दबाव डाल रहा है। युवा रोजगार के अवसरों की तलाश में भटक रहे हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, कृषि लागत और आर्थिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ठोस समाधान की आवश्यकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश का युवा रोजगार मांग रहा है, किसान अपनी समस्याओं का समाधान चाहता है, महिलाएं महंगाई से राहत चाहती हैं और गरीब परिवार बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की अपेक्षा कर रहे हैं, तब सरकार इन मुद्दों पर ठोस जवाब देने के बजाय राजनीतिक बहसों में जनता का ध्यान क्यों उलझा रही है?

संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत

विधायक ने कहा कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका, संसद और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास कायम रहना बेहद जरूरी है। लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। विपक्ष की आवाज को दबाने या आलोचना को राजनीतिक विरोध मानकर नजरअंदाज करने से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किसी भी लोकतांत्रिक देश की बुनियादी पहचान है। इन अधिकारों की रक्षा करना हर सरकार की जिम्मेदारी है।

लोकतंत्र बचाने की लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, देश के भविष्य की लड़ाई है

श्रीमती अंबिका मरकाम ने कहा कि कांग्रेस की लोकतंत्र बचाओ मुहिम किसी पद, प्रतिष्ठा या सत्ता की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह देश के संविधान, लोकतांत्रिक परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास है। देश की जनता जागरूक है और वह केवल भाषण एवं नारों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। जनता को रोजगार, महंगाई से राहत, किसानों की खुशहाली, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं का भविष्य और बेहतर बुनियादी सुविधाएं चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव और शहर-शहर जाकर जनता के वास्तविक मुद्दों को उठाते रहेंगे। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और सरकार की जवाबदेही भी जनता के प्रति ही होनी चाहिए।

विधायक अंबिका मरकाम ने अंत में कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल रैलियों और नारों से नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों का पालन करने, जनता के अधिकारों का सम्मान करने और सरकार को हर मुद्दे पर जवाबदेह बनाने से होती है। कांग्रेस पार्टी संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और आम जनता की आवाज बुलंद करने के अपने संकल्प पर हमेशा अडिग रहेगी। देश की जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।