रायपुर।हमर चिन्हारी साहित्य समिति एवं साहित्य लेखन रिसोर्स शिक्षक परिवार छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में “मोर अंगना के शोर” साझा बाल काव्य संग्रह का पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह 29 जून 2026, प्रातः 10:00 बजे वृंदावन हॉल, सिविल लाइन, रायपुर में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया जाएगा। साझा बाल काव्य संग्रह के संपादक विरेन्द्र कुमार साहू प्रधानपाठक पाटन दुर्ग के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के शिक्षकों को जोड़कर इस किताब का निर्माण किया गया है।

इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि केदार कश्यप मंत्री वन एवं जलवायु परिवर्तन,परिवहन सहकारिता संसदीय कार्य छ.ग.शासन, गजेन्द्र यादव मंत्री के स्कूल शिक्षा ग्रामोद्योग विधि एवं विधायी कार्य, छत्तीसगढ़ शासन, टंकराम वर्मा मंत्री राजस्व एवं आपदा प्रबंधन पुनर्वास ,उच्च शिक्षा, छत्तीसगढ़ शासन, गुरु खुशवंत साहेब मंत्री कौशल विकास तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास छत्तीसगढ़ शासन, मोतीलाल साहू विधायक रायपुर ग्रामीण, अनुज शर्मा विधायक धरसींवा, प्रभात मिश्र, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, माननीय श्रीमती डॉ अभिलाषा बेहार सचिव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, अमित चिमनानी जी (सी.ए.) भा.ज.पा. छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रवक्ता, माननीय श्रीमती डॉ गीतादेवी, प्रदेश कोषाध्यक्ष भा.ज.पा. सहकारिता प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़, के.शारदा राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका, रहेंगे।
समारोह में प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक एवं रचनाकारों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम में पुस्तक से जुड़े सभी रचनाकारों को स्मृति-चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही खैरागढ़ से संगीत शिक्षा प्राप्त शिक्षकों द्वारा छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति पर आधारित मनमोहक गीत-संगीत की प्रस्तुति भी दी जाएगी। कार्यक्रम के आयोजक हमर चिन्हारी साहित्य समिति एवं साहित्य लेखन रिसोर्स शिक्षक परिवार छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में श्रीमती ऋचा सिंह संरक्षक, संपादक विरेन्द्र कुमार साहू प्रधानपाठक पाटन दुर्ग, श्रीमती मीनारानी दुबे अध्यक्ष के निर्देशन में हो रहा है।
आयोजकों ने साहित्य प्रेमियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं आमजन से इस ऐतिहासिक साहित्यिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने का आग्रह किया है। यह आयोजन बाल साहित्य, समावेशी शिक्षा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।






