पाटन, दुर्ग। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड में 15 जून से 15 जुलाई 2026 तक संचालित सघन कुष्ठ जांच एवं खोज अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन का निरीक्षण करने हेतु केंद्रीय टीम ने पाटन विकासखंड के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण कर अभियान की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य अभियान के दौरान घर-घर सर्वेक्षण की गुणवत्ता, संभावित कुष्ठ रोगियों की पहचान, उपचार व्यवस्था तथा ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रणाली का मूल्यांकन करना था।
निरीक्षण दल में केंद्रीय टीम से डॉ. श्वेता साहू मेडिकल ऑफिसर,एवं श्री मसीह आरएलटीआई, रायपुर शामिल रहे। उनके साथ जिला कुष्ठ अधिकारी दुर्ग डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव, डीएलसी भुनेश कोसमा, एनएमए जाकिर खान तथा पाटन विकासखंड से डॉ. बी. कठौतिया बीएमओ, पूनम साहू बीपीएम,चंद्रकांता साहू बीईटीओ,एवं बसंत साहू आरएचओ उपस्थित रहे।
केंद्रीय टीम ने ग्राम छाटा, गोंड़पेंड्री एवं सेलूद का भ्रमण कर मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे घर-घर सर्वेक्षण का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। टीम ने सर्वेक्षण के दौरान प्रत्येक परिवार तक पहुंचने की प्रक्रिया, ग्रामीणों से संवाद, कुष्ठ रोग के प्रारंभिक लक्षणों जैसे त्वचा पर सुन्न सफेद या तांबे रंग के चकत्ते, हाथ-पैरों में सुन्नपन, नसों में सूजन तथा दर्द के संबंध में दी जा रही जानकारी का अवलोकन किया। साथ ही संदेहास्पद मरीजों की पहचान एवं उन्हें स्वास्थ्य संस्थान तक भेजने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान घरों की बाहरी दीवारों पर अभियान के अंतर्गत किए जा रहे मार्किंग कार्य, सर्वेक्षण प्रपत्रों का संधारण, दैनिक प्रगति का रिकॉर्ड तथा यूएचएस पोर्टल में ऑनलाइन डेटा प्रविष्टि की प्रक्रिया का भी बारीकी से परीक्षण किया गया। केंद्रीय टीम ने ऑनलाइन रिपोर्टिंग की गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर विशेष जोर देते हुए सभी जानकारी का सही एवं अद्यतन रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए।
दल ने अभियान के दौरान उपचार प्राप्त कर रहे कुष्ठ रोगियों से भी मुलाकात की। इस दौरान रोगियों के नियमित दवा सेवन, उपचार की प्रगति, नसों की स्थिति, डिफॉर्मिटी एवं कुष्ठ रिएक्शन की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। साथ ही रोगियों को उपचार बीच में न छोड़ने, नियमित रूप से स्वास्थ्य संस्थान में फॉलो-अप कराने तथा स्वयं की देखभाल अपनाने के संबंध में भी जागरूक किया गया।
केंद्रीय टीम ने मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से चर्चा कर अभियान के दौरान आने वाली चुनौतियों एवं उनके समाधान की जानकारी भी प्राप्त की। टीम ने सर्वेक्षण कार्य में सक्रिय सहभागिता, ग्रामीणों को जागरूक करने के प्रयास, संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान तथा ऑनलाइन रिपोर्टिंग व्यवस्था की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि 15 जून से 15 जुलाई 2026 तक संचालित इस विशेष अभियान का उद्देश्य घर-घर जाकर कुष्ठ रोग के संभावित मरीजों की शीघ्र पहचान करना, समय पर उनका उपचार प्रारंभ करना, रोग के संक्रमण की श्रृंखला को रोकना तथा कुष्ठ रोग से होने वाली स्थायी विकलांगता को रोकना है। स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर सुन्न सफेद अथवा तांबे रंग के चकत्ते दिखाई दें, हाथ-पैरों में सुन्नपन या नसों में दर्द एवं कमजोरी महसूस हो, तो बिना किसी संकोच के निकटतम शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। कुष्ठ रोग का उपचार पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध है तथा समय पर उपचार से यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है।







