बरबाधा गांव में किसानों के लिए स्वीकृत बांध वर्षों से अधूरा, ग्रामीणों में भारी आक्रोश


*टूटे हुए बांध की मरम्मत और पुनर्निर्माण अधर में, विभाग ने केवल संकेतक बोर्ड लगाकर निभाई औपचारिकता*

नगरी, सिहावा, बेलरगांव।।नगरी विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम बरबाधा में किसानों की जीवनरेखा माने जाने वाला सिंचाई बांध वर्षों से बदहाली का शिकार बना हुआ है। जंगल किनारे स्थित लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में निर्मित यह बांध वर्ष 1974 में बनाया गया था, जिससे लंबे समय तक किसानों को भरपूर सिंचाई सुविधा मिलती रही। किंतु करीब 15–20 वर्ष पूर्व अधिक वर्षा के कारण यह बांध क्षतिग्रस्त होकर टूट गया, जिसके बाद से आज तक इसकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण नहीं हो सका है।
बांध के टूटने के बाद से गांव के किसान खेती के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर हो गए हैं। कई बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 में इस बांध के पुनर्निर्माण के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति मिलने की जानकारी दी गई थी, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो निर्माण कार्य शुरू हो पाया और न ही मौके पर कोई ठोस गतिविधि दिखाई दे रही है। वर्तमान में बांध की स्थिति अत्यंत जर्जर बनी हुई है, जिससे जल संग्रह संभव नहीं हो पा रहा और किसान सिंचाई सुविधा से वंचित हैं।
इस संबंध में पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव ने बताया कि कांग्रेस शासनकाल में इस बांध के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं किया गया। उन्होंने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने वास्तविक निर्माण कार्य करने के बजाय केवल एक सूचना बोर्ड लगाकर औपचारिकता पूरी कर दी है। बोर्ड पर जलाशय की जानकारी तो दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी बांध टूटा पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब बांध का अस्तित्व ही नहीं है, तो केवल बोर्ड लगाने का क्या औचित्य रह जाता है।
इस संबंध में पूर्व सरपंच दमन सिंह, पीला राम कोराम, महेश नेताम, रामसुंदर, गोकुल विक्रम सहित समस्त ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन से मांग की, जिसके बाद यह कार्य स्वीकृत तो हुआ, लेकिन आज तक धरातल पर उतरा नहीं।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र अतिशीघ्र बांध के अधूरे निर्माण कार्य को पूर्ण कराया जाए, ताकि क्षेत्र को पुनः सिंचाई सुविधा मिल सके और किसानों को राहत मिल सके। वर्षों से लंबित इस समस्या को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग केवल कागजी कार्रवाई और प्रतीकात्मक बोर्ड तक सीमित रहता है या वास्तव में जमीनी स्तर पर बांध निर्माण कर किसानों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान करता है।