पंडरिया।शिक्षा विभाग द्वारा लगातार गुणवत्ता सुधारने का दावा किया जा रहा है तथा इसके लिए रोज नए – नए आदेश निर्देश जारी किए जा रहे हैं।शिक्षक व विद्यार्थी की उपस्थिति ऑनलाइन की जा रही है,डिजिटल शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है।किंतु बिना पाठ्यपुस्तक के कैसे गुणवत्ता सुधार हो सकता है।शिक्षा सत्र का लगभग पखवाड़े भर का समय बीत चुका है,लेकिन पुस्तक नहीं मिलने के कारण कई विषयों का पढ़ाई अब तक शुरू नहीं हो पाया है।इन विषयों में गुणवत्ता की उम्मीद कैसे की जा सकती है।मिडिल स्कूलों में 6 वी कक्षा का संस्कृत(दीपिकम),व सामाजिक विज्ञान व कौशल बोध,7 वी कक्षा का सामाजिक विज्ञान पुस्तक अब तक प्राप्त नहीं हुआ है,जिसके कारण उक्त विषय का पढ़ाई अभी शुरू नहीं हो पाई है।चूंकि दोनों कक्षाओं के कोर्स बदल चुका है,जिसके कारण पुराने पुस्तक से भी पढ़ाई कराना संभव नहीं है।पुस्तक नहीं मिलने से शासन का गुणवत्ता सुधारने का दावा खोखला नजर आता है।जिन विषयों का पुस्तक मिला है,वह भी अपर्याप्त है।मांग के अनुसार पुस्तक विद्यालयों को नहीं मिला है।
गणवेश नहीं मिला-पाठ्यपुस्तक के अलावा गणवेश किसी भी विद्यालय को अब तक नही मिले हैं।विद्यार्थी अभी पुराने गणवेश या अन्य कपड़े पहुंचकर विद्यालय पहुंच रहे हैं।प्रवेश उत्सव में गणवेश देने की बात कही गई थी किंतु ब्लाक के किसी भी स्कूल में आज तक गणवेश नहीं पहुँची है।बताया जा रहा है कि इस वर्ष बच्चों के गणवेश में भी परिवर्तम किया गया है।गणवेश आने के बाद ही पता चल पाएगा।
“जिन पुस्तको की कमी थी उसके लिए मांग पत्र भेजी गई है,जल्द ही पुस्तक उपलब्ध हो जाएगा।नया गणवेश होने के कारण पूर्ति नहीं हो पाई है,उच्च कार्यालय से गणवेश मिलते ही वितरित कर दी जाएगी।
दीपक सिंह ठाकुर,बीईओ पंडरिया।







