असत्य,अधर्म और बुराई रूपी रावण पर विजय का पर्व विजयादशमी
गगनभेदी जय श्री राम के नारे से गूंजा आसमान
अंडा। फोटो। विजयदशमी का पर्व गुरुवार को परंपरा अनुसार उत्साह के साथ मनाया गया जगह-जगह आतिशबाजी के साथ अहंकारी रावण का पुतला दहन किया गया रावण के साथ-साथ बुराई के प्रतीक कुंभकरण और मेघनाथ काफी पुतला जलाया गया जय श्री राम के नारे के साथ राष्ट्रीय एकता का संदेश अब बुराइयों को खात्मे का संकल्प लिया गया
रावण दहन के पूर्व रामलीला मंडली के कलाकारों द्वारा राम रावण के बीच संवाद और युद्ध का मंचन किया गया। श्री राम ने दशानन रावण की नाभि पर अग्निबाण चलकर रावण का वध किया इस मौके पर जमकर आतिशबाजी किया गया। अंडा से 7 कि. मी. दूरी व बालोद जिला मुख्यालय से अंतिम छोड 40 किमी दूर जिले के ग्राम सिरसिदा में दशहरा पर जमीन अथवा आसमान में नहीं बल्कि तालाब के बीचोबीच तैरते हुए रावण का दहन किया गया। इस कार्यक्रम में अतिथि गण अध्यक्ष जनपद पंचायत गुण्डरदेही पुरुषोत्तम चंद्राकर, ग्राम पंचायत सिरसिदा सरपंच सरस्वती इन्द्रजीत चंद्राकर, लक्ष्मीनारायण चन्द्राकर सिरसिदा के समिति के अध्यक्ष कुलेश्वर प्रसाद देवांगन उपाध्यक्ष अक्षय चंद्राकर सचिव नेलशन देवांगन सदस्य खेमन , प्रहलाद, लवण, रामगोपाल, चंद्र प्रकाश, ढालसिंह, टोमेन्द्र, डोगेन्द्र, बालगोविंद, तोरण गिरधर, प्रेमलाल, धर्मराज, खिल्लू, गुलाब, कोमेंद्र, रितेश, जितेश्वर, तानु देवेन्द्र , छन्नु धन्ना, गौरव, यशवंत, चंदन, आशीष, तुलेश्वर, रामकृष्ण, मिलन, दीपक, खिलेंद्र आत्मा साहू लक्ष्मण चंद्राकर आदि ने बताया कि कुछ अलग करने के जुनून में वर्ष 1994 में पहली बार तालाब के बीच रावण का पुतला खड़ा कर जलाया गया। शुरुआत के कुछ सालों को छोड़ कर हर बार 40 फीट का पुतला दहन किया गया। रावण पुतला दहन के पश्चात रात्रि कालीन 11:00 बजे छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम रंग मया कोडेवा की प्रस्तुती दी गई। यह जानकारी पूर्व सरपंच खेमन लाल चन्द्राकर ने दी।







