पाटन। दक्षिण पाटन में स्थित खारुन नदी को इस क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव का जीवन दायिनी नदी कहा जाता है। वही इस नदी पर पानी को रोकने के लिए कई जगह पर एनिकेट का निर्माण किया गया है । वहीं पूर्ववर्ती सरकार के द्वारा नदी का कटाव को देखते हुए इस पर रोक लगाने हेतु तटबंध निर्माण के लिए भी करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत किए गए थे ।

लेकिन अभी आलम यहां है कि तटबंध निर्माण कई सालों से अधूरा ही पड़ा है। वहीं जानकारी के मुताबिक एनीकेट निर्माण के लिए ग्राम किकर मेटा अरकार के मध्य जो जर्जर अनिकेत है उसके संधारण एवं पुनर्निर्माण के लिए ढाई करोड़ राशि स्वीकृत हुई है लेकिन इसके बाद भी अभी तक काम शुरू नहीं किया जा सका है। यह सभी समस्याओं से ग्राम पंचायत की किकर मेटा के सरपंच नेतराम निषाद ने आज जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप को अवगत कराया।
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम किकर मेटा अरकार
के मध्य एनीकेट बना हुआ था। एनीकेट काफी जर्जर हो गया है। एनीकेट जर्जर होने के कारण इस अनिकेत पर पानी का बहाव रुकता ही नहीं है। इस कारण नदी लगभग सुखी ही रहती है। एनिकेट की संधारण एवं पुनर्निर्माण की मांग करते हुए सरकार से राशि स्वीकृत करने की मांग की गई थी जिस पर जल संसाधन विभाग ने ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए एनीकेट का संधारण एवं पुनर्निर्माण के लिए करीब ढाई करोड रुपए की भी स्वीकृति प्रदान की है।
किकर मेटा के सरपंच नेतराम निषाद ने बताया की राशि स्वीकृत हुए बहुत समय हो गया है लेकिन अभी तक एनीकेट का संधारण एवं पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है । इस समस्या से आज मंत्री केदार कश्यप को अवगत कराया।। उन्होंने आश्वस्त किया कि जल्द ही एनीकेट का संधारण कराया जाएगा इसके अलावा किकर मेटा अरकार के आसपास दो भाग में इस तटबंध का निर्माण होना था । निर्माण कार्य शुरू हुआ और कुछ दूरी तक निर्माण कार्य हुआ भी है ।
लेकिन उसके बाद अचानक काम बंद हो गया और अभी तक यह काम बंद है। तटबंध निर्माण का कार्य अभी भी अधूरा है। इस समस्या से भी मंत्री जल संसाधन केदार कश्यप को अवगत कराया गया है ।इस समस्या को देखते हुए मंत्री केदार कश्यप ने जल्द ही पाटन क्षेत्र की दौरा करने की भी बात कही साथ ही साथ जो काम रुका हुआ है उसे भी शुरू करने की बात कही।। मंत्री से मिलने वालों में सरपंच नेतराम निषाद के अलावा ग्रामीण अन्य नागरिक भी मौजूद थे।






