पंडरिया-नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पोला का त्यौहार गुरुवार को मनाया गया।पोला का पर्व ब्लाक के स्कूलों तथा गांवों में उत्साह पूर्वक मनाया गया।इस अवसर पर बच्चे मिट्टी के बैल चलाते हुए दिखे वहीं अन्य खिलौने खेलते नजर आए।यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
इस पर्व में बैलों की पूजा की जाती है।कृषि कार्य में बैलों और गोवंश के महत्वपूर्ण योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए इस दिन बैलों की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन बैलों से खेती का कोई भी काम नहीं कराया जाता है और उन्हें नहला-धुलाकर सजाया जाता है। साथ ही इस अवसर पर बाजारों में मिट्टी से बने बैल, बर्तन (चुकी-पोरा) और खिलौने बिकते हैं, जिनसे बच्चे खेलते हैं और घरों में प्रतीकात्मक पूजा होती है।वहीं घरों में महिलाएं ठेठरी, खुरमी, गझिया और अन्य छत्तीसगढ़ी व क्षेत्रीय पकवान बनाती हैं।
स्कूली बच्चों ने बनाएं खिलौने-स्कूलों में भी बच्चों ने खिलौने बनाकर पूजा अर्चना की।वहीं बच्चों को इस पर्व के संबंध के जानकारी प्रदान की गई।मिडिल स्कूल डोमसरा के बच्चों ने इस दौरान मिट्टी के खिलौने बनाएं वहीं ब्लैक बोर्ड पर बैल व अन्य आकृति बनाकर पोला के महत्व को बताया।







