रिपोर्टर- चंद्रभान यादव

जशपुर।आषाढ़ का महीना शुरू हो चुका है। इस माह में हर साल जंगल में हरियाली नजर आती थी। इस वर्ष बारिश नहीं होने से जंगल से धुआं उठता हुआ या फिर आग की लपटों से घिरा जंगल दिखाई पड़ रहा है। मार्च व अप्रैल के महीने में जंगल में आग की मुख्य वजह महुआ संग्रहण था। वहीं अब ग्रामीण पुटू व मशरूम के लिए जंगल में आग लगा रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि जली हुई जमीन पर जब बारिश की बूंदे गिरती हैं तो पुटू का उत्पादन अच्छा होता है। हालांकि यह सिर्फ मान्यता है। पुटू का उत्पादन के लिए जमीन में कोयला या राख की कोई जरूरत नहीं होती है।
वन विभाग के कर्मचारी सूचना के आधार पर आग लगने वाले स्थान पर पहुंच रहे हैं और आग बुझाने की कार्रवाई भी चल रही है। पर रोजाना आग लगने का सिलसिला जारी है। दो दिन पहले बगीचा इलाके में कंचनडीह के जंगल में आग लगी थी। सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची थी।






