पंडरिया-ब्लाक के वनांचल गांवों में इन दिनों सरसों की पीली चादर दिखाई दे रही है।वनांचल सरसों के भीनी खुशबू से महक रहा है।लेकिन सरसों का रकबा पिछले वर्ष की अपेक्षा कम हुआ है।पिछले सो वर्षों से सरसों का रकबा कम हुआ है।धान की खेती अधिक होने के कारण वनांचल में सरसों का रकबा घटते जा रहा है।2022 में सरसों का रकबा 900 हेक्टेयर था,2023 में 670 हेक्टेयर तथा 2024 में 437 हेक्टेयर हो गई।वहीं इस वर्ष सरसों का रकबा घटकर 400 हेक्टेयर से भी कम हो गया है।सरसों के फसल को तैयार होने में करीब 100 दिन का समय लगता है।बैगा असिवसी परिवार पहाड़ी ढलनों पर सरसों की खेती करते हैं।सरसों के दाने को बेचकर इससे आय प्राप्त करते हैं वहीं तेल निकालकर इसका उपयोग करते हैं।ब्लाक अन्तर्गत छिंदीडीह, झूमर,सेजाडीह,पंडरीपानी, जामुनपानी,कुंडापानी, बिरहुलडीह,मंझगांव,धुरसी,बांगर,कोदवागोड़ान, चतरी सहित अनेक गांवों में सरसों की खेती की जाती है।







