छिंद के फल पक गए,बच्चे बड़े रुचि के साथ खाते हैं,सेहत के लिए अच्छा होता है


पंडरिया।गर्मी के मौसम में छिंद के फल अब पक चुके हैं।जिसे खाने छोटे बच्चे सुबह से ही पेड़ के आस-पास पहुंच जाते हैं।नगर में कई जगह इनके पौधे उगे हैं,पिछले कुछ वर्षों से नगर में छिंद के पेड़ बढ़े हैं,पहले नगर में छिंद के कुछ ही पौधे थे,लेकिन अब बहुत संख्या में छिंद के पेड़ दिखाई पड़ते हैं।दुर्ज़ाबन्द तालाब व आस-पास के खेतों के मेढ़ पर,नया बाजार,पाढ़ी रोड सहित अनेक जगहों के छिंद के पेंड दिखाई देते हैं।इसके फल को बच्चे बहुत खाते हैं।इसे देशी खजूर के रूप में खाते हैं।इसके फल का आकार व बनावट खजूर जैसा ही होता है।किंतु इसके पौधे व फल का आकार खजूर से छोटा होता है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में खजूर की प्रजाति के छिंद के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं।इसके पौधे बिना कोई जतन किए अपने आप उगते हैं। इसके फल मीठे लगते हैं । इसका ताजा रस मीठा होता है।लेकिन समय के साथ ही इसका रस सल्फी की तरह मादक हो जाता है।इसमें कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। इसलिए कुपोषित बच्चों के आहार में इसे शामिल किया जाता है। छिंद में प्रोटीन व फाइबर की मात्रा अधिक होती है।
जिससे कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। इसलिए कब्ज की शिकायत होने पर इसका सेवन कर सकते हैं।