पाटन में सामान्य सभा बनी सवालों का रणक्षेत्र, जवाबों से असंतुष्ट सदस्यों का फूटा आक्रोश


पाटन।। जनपद पंचायत पाटन की सामान्य सभा की बैठक इस बार महज औपचारिकता नहीं रही, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों के तीखे सवालों और अधिकारियों की जवाबदेही पर सीधा हमला बन गई। मनरेगा और जल जीवन मिशन जैसे अहम मुद्दों पर संतोषजनक जवाब न मिलने से सदन में नाराजगी खुलकर सामने आई।
बैठक में सभी जनपद सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी समस्याएं उठाईं, लेकिन अधिकारियों के ढुलमुल रवैये ने माहौल को और गरमा दिया। गांवों में बढ़ती सूखे की स्थिति और तालाबों में पानी भरने की मांग जोरदार तरीके से उठी।
सबसे ज्यादा निशाने पर रहा जल जीवन मिशन, जिसे कई सदस्यों ने “सफेद हाथी” करार दिया। “हर घर जल” का दावा जमीनी हकीकत में फेल होता दिख रहा है—कई गांवों में टंकियों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। सदस्यों ने साफ कहा कि जिन कार्यों को विभाग “पूर्ण” बता रहा है, वे हकीकत में अधूरे पड़े हैं।
मनरेगा को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। जनपद सदस्य श्रीमती रश्मि भेद वर्मा ने बताया कि मजदूरों को काम नहीं मिल रहा, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
वहीं, जनपद सदस्य दिनेश साहू ने वृक्षारोपण के नाम पर हो रही खानापूर्ति पर सवाल उठाए। इस मुद्दे पर कांग्रेस समर्थित सदस्यों ने भी उनका समर्थन किया, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने से सदन में मायूसी और नाराजगी दोनों देखने को मिली।
धान खरीदी में अनियमितताओं का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। जनपद सदस्य आनंद बघेल ने झीट और सुरपा समितियों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
बैठक में विधायक प्रतिनिधि जवाहर वर्मा सबसे मुखर नजर आए। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कई विभागों के जिम्मेदार अधिकारी बैठक को गंभीरता से नहीं लेते, यही वजह है कि वे सदन में अनुपस्थित रहते हैं। उन्होंने पाटन ब्लॉक में पीएम आवास योजना में पात्र-अपात्र के खेल पर भी सवाल उठाए और नोडल अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की।
बैठक में जनपद अध्यक्ष श्रीमती कीर्ति नायक, उपाध्यक्ष कमलेश वर्मा, सीईओ जागेंद्र साहू सहित जनपद सदस्य और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, जवाबों से असंतुष्टि और बढ़ते आक्रोश ने यह साफ कर दिया कि जमीनी समस्याओं का समाधान अभी भी दूर की बात है।