हाफ नदी की धार टूटने के कगार पर,एक सप्ताह में बहाव बंद हो जाएगा,गर्मी में निस्तार सहित पेयजल संकट का खतरा


पंडरिया।नगर से गुजरने वाली हाफ नदी का धार अन्यन्त क्षीण हो गई जो करीब एक सप्ताह में बंद हो जाएगी ।नदी ऑखने के बाद आस पास के क्षेत्रों में आगामी गर्मी के दिनों में पेयजल संकट की स्थिति बन जाती है।नगर से सटे बिशेषरा ग्राम के आगे नदी सूख गया है।अधिकतर गांव नदी पर निर्भर है।स्टाप डेम वाले जगहों पर ही पानी जमा हुआ है।हाफ नदी में बहाव टूटने के कारण नदी किनारे स्थित गांवों में लोगों की परेशानी बढ़ेगी।हाफ नदी ब्लाक के वनांचल ग्राम पंडरीपानी व बोड़ला ब्लाक के दलदली के मध्य मैकल
पर्वत श्रेणी से निकलती है।जो बेमेतरा जिले से होते हुए नांदघाट के पास शिवनाथ नदी में मिल जाती है।इस नदी की लंबाई करीब 45 किलोमीटर है।हाफ नदी जिले की सबसे बड़ी व लंबी नदी है।नदी सूखने के कारण आस-पास के गांवों में हेण्डपम्प बंद हो जाते हैं।नदी किनारे स्थित नवागांव,धोबघट्टी,डोमसरा, पिपरखूँटी,खरहट्टा,दुल्लापुर,अखरा सहित लगभग सभी गांवों के हेण्डपम्प का जल स्तर नीचे चला जाता है,जिसके कारण हैंड पम्प बंद हो जाता है।वहीं कुछ पम्प में ही पानी आता है जिससे निस्तार हो पाती है।हाफ नदी पिछले 2020 व 2021में कोरोना के दौरान नहीं सुखी थी।जिसके बाद लगातार मार्च-अप्रेल महीने में ही सुख रही है।इससे स्पष्ट है कि नदी के सूखने के मुख्य कारण मानवीय हस्तक्षेप व नदी जल का बेतरतीब दुरपयोग है।शासन-प्रशासन व आम लोगों को नदी जल के संरक्षण के लिए संयुक्त प्रयास करना चाहिए।किंतु संरक्षण हेतु कोई प्रयास नहीं किये जा रहे हैं।
लोगों के जीवन पर प्रभाव-हाफ नदी क्षेत्र के गांवों के लिए जीवन दायिनी नदी है।जिससे क्षेत्र के करीब 200 से अधिक गांव के लोगों का जीवन यापन होता है।हाफ नदी के किनारे स्थित गांव के लोग हाफ नदी से सब्जी भाजी से लेकर खेती के कार्य लिए इसी पर निर्भर हैं।इसके अलावा ईंट निर्माण सहित कई औद्योगिक कार्य होते हैं।नदी के सूखने से लोगों के जीवन पर प्रभाव पड़ता है।
सदवाहिनी नदी होती थी हाफ नदी-करीब 12 वर्ष पूर्व यह नदी सदवाहनी नदी के रूप में थी,जिसमे पूरे वर्ष पानी का बहता था।किंतु विगत कुछ वर्षों से यह नदी गर्मी के मौसम के सूख रही है।लगातार बेतरतीब दोहन व मानव हस्तक्षेप के चलते अब यह सदवाहिनी नहीं रही।
संरक्षित करने की जरूरत-हाफ नदी क्षेत्र की सबसे बड़ी नदी है,जिसे संरक्षित करने की जरूरत है। इस नदी के माध्यम से नदी किनारे स्थित 200 से अधिक गांव के लोगों की जीविका चलती है।लेकिन इसके संरक्षण के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।नदी में बढ़ते प्रदूषण व व बेतरतीब पानी का दोहन सहित रेत उत्खनन से नदी के सदावाहनी होने में बाधा बन रही है।शासन को लोगों के साथ मिलकर नदी के संरक्षण के लिये प्रयास करने की आवश्यकता है।
स्टाप डेम की जरूरत-नदी में कई स्थानों पर अनेक स्टाप डेम बने हैं जहां पानी भरे रहते हैं।जिससे स्टाप डेम के आस-पास के गांवों में पानी का स्तर बना रहता है।वहीं अनेक गांवों में नदी सुख जाने व स्टाप डेम नहीं होने से गांवों में पानी की समस्या होती है।नदी में कुबा खुर्द के बाद बनिया कुबा के पास स्टाप डेम बना हुआ है।इनके बीच बिशेषरा, रौहा,मंझोली,देवपुरा,धोबघट्टी, नवागांव हटहा,डोमसरा,पिपरखुटी,खरहट्टा,सहित अनेक गांवों में करीब 10 किलोमीटर में पानी की समस्या होती है।धोबघट्टी व डोमसरा के पास स्टाप डेम बनाकर इन गांवों की समस्या को दूर किया जा सकता है।उक्त दो स्थानों पर स्टाप डेम बनाकर इन गांवों को राहत दी जा सकती है।
“गांव की जरूरत व लोगों की मांग के अनुसार स्टाप डेम बनाये जा रहे हैं।जरूरत वाले स्थान पर स्टाप डेम के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे।”
कौशल किशोर शर्मा एसडीओ सिचाई विभाग पंडरिया।