कौही ईंट भट्ठा मामला पहुंचा हाईकोर्ट, कलेक्टर, नायब तहसीलदार सहित अन्य से मांगा जवाब, याचिकाकर्ता को मिला स्थगन आदेश , पढ़िए पूरी खबर

पाटन।  कुम्हार का परम्परागत काम करने वाले याचिकाकर्ता को नायब तहसीलदार ने अपने एक आदेश से रोक दिया। आजीविका रोके जाने के मामले में सुनवाई कर हाईकोर्ट ने नायब तहसीलदार के आदेश पर स्थगन किया है। साथ ही कलेक्टर दुर्ग समेत प्रतिवादी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कुमोद प्रजापति पिता हिरालाल प्रजापति जाति कुम्हार निवासी ग्राम कौही तहसील पाटन जिला दुर्ग ने उच्च न्यायलय में नायब तहसीलदार पाटन जिला दुर्ग द्वारा दिए स्थगन आदेश 26 फरवरी 2026 के विरुद्ध उच्च न्यायलय में अपने अधिवक्ता – नसीमुद्दीन अंसारी एवं खेमचंद प्रजापति के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की। सुनवाई करते हुए उच्च न्यायलय ने नायब तहसीलदार पाटन के आदेश को स्तगित करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में स्थगन प्रदान किया है।

जानकारी के मुताबिक दस लाख तक रायल्टी से मुक्त बोर्ड अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के 22 अगस्त 2015 को माटीकला समक्ष मांग करने पर यह आदेश दिया गया कि कुम्हार जाति द्वारा पारिवारिक पेशा इंट मिट्टी के बर्तन बनाये जाने के लिए उन्हें किसी भी प्रकार की दस लाख तक रायल्टी से मुक्त रखा गया है। सार्वजानिक स्थान से सभी दिशाओं से 50 मीटर तक निर्माण नहीं किया जायेगा। 50 मीटर को छोड़कर निर्माण के अनुमति दी गई है।

बिना नोटिस-बिना सुनवाई के दिया स्थगन आदेश

याचिकाकर्ता का परिवार कई पीढियां से मिट्टी के बर्तन कवेलू, ईंट, सुराही, मटका आदि बनाता आ रहा है। गांव के हेमलाल सोनकर पिता कृष्ण कुमार सोनकर उपसरपंच एवं मोहन लाल देवांगन हेडमास्टर पूर्व माध्यमिक शाला कौही पाटन ने झूठी शिकायत कर दी। इससे याचिकाकर्ता के पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहे इस काम पर नायब तहसीलदार ने रोक लगा दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने उच्च न्यायलय को बताया कि नायब तहसीलदार पाटन दुर्ग की कार्यवाही विधि विरुद्ध है क्योंकि बिना नोटिस और बिना सुनवाई का मौका दिए सीधा स्थगन कर दिये थे।

हाईकोर्ट ने जाहिर की नाराजगी

हाईकोर्ट ने इस पर खनिज विभाग के अधिकारी एवं नायब तहसीलदार पाटन पर नाराजगी व्यक्त की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद उच्च न्यायलय ने कलेक्टर दुर्ग, तहसीलदार, पाटन खनिज विभाग, उप सरपंच एवं अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब मांगा है। पाटन तहसील के नायब तहसीलदार के स्थगन पर याचिकाकर्ता के पक्ष में रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने बताया कि, 26 सितंबर 2006 को अवर सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया कि प्रत्येक ग्राम पंचायतों में कुम्हारों के लिए 5 एकड़ भूमि आरक्षित की जाये। भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में कुम्हारों के लिए 5 एकड़ भूमि आरक्षित की जाये, लेकिन आज तक अवर सचिव के आदेश का पालन नहीं किया गया है।