जिस प्रकार से देवता और दानव मिलकर मंथन किया जिससे विष और अमृत कलश प्राप्त किया गया

अंडा।ग्राम समोदा में श्री मद भागवत कथा बजरंग सेवा समिति एवम समस्त ग्रामवासी के तत्वाधान में आयोजन का पांचवां दिवस के की कथा की वर्णन करते हुए कथा वाचक पंडित श्री रेवेंद्र वैष्णव दाऊजी महाराज गजेंद्र मोक्ष , समुद्र मंथन एवम् वामन अवतार का वर्णन करते हुए कहा कि समुद्र मंथन में जिस प्रकार से देवता और दानव मिलकर मंथन किया जिससे विष और अमृत कलश प्राप्त किया गया उसी तरह से समाज के बुराइयों को भागने के लिए हम सबको अपने मन रूपी समुद्र का मंथन करना होगा जिससे अच्छाई रूपी अमृत को समाज को परोसना होगा और बुराई रूपी विष को समाज से दूर करना होगा इस अवसर पर गांव के ईश्वरी देशमुख, शिषुपाल, गुलाब, ढाल, डोमन,देवकी, धान बाई, सुखनंदन देशमुख, भुनेश्वरी, पंचु निषाद, परमेश्वर चौहान, नरेंद्र निषाद, पीतांबर,युवराज, बल राम निषाद,क्रोधी ,दिलीप, गजपति,तरुण, तुला राम देशमुख, जितेंद्र,लखन निषाद,जितेंद्र,शिव, टेंकेश्वर, जयचंद,दिनेश, अलख राम यादव, सुख राम यादव, रामप्रसाद, रूपनारायण देशलहरे, राम निषाद गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।