धूमधाम से निकली भगवान श्रीकृष्ण की बारात, भगवान के शादी में जमकर झूमे भक्त, सेलूद में आयोजित भागवत कथा में उमड़ रही भीड़, रूखमणी विवाह प्रसंग, सुदामा चरित्र की कथा सुनाई


पाटन। श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में आज  पंडित कृष्णा नंदन महाराज ने श्री कृष्ण रूखमणी विवाह की  कथा सुनाई। श्री कृष्ण की बारात धूमधाम से निकाली गई। भागवत  कतार के आयोजक वर्मा परिवार के साथ पूरा गांव के श्री कृष्ण रूखमणी विवाह में शामिल हुवे। विवाह की सभी रस्म पूरा किया।  उन्होंने कहा की  ईश्वर तो कण-कण में हैं। लेकिन वह दिखाई नहीं देते हैं। उद्धारण के तौर पर पानी में नमक घोलते हैं तो दिखाई नहीं देता है। लेकिन चखने पर प्रतीत होता है। उसी प्रकार परमात्मा कण-कण में व्याप्त हैं। परमात्मा को तो केवल भक्ति से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने नवरात्रि के समय में कन्याओं के पूजन व कन्याओं की रक्षा करने का संदेश देते हुए कहा कि सनातन धर्म में कन्याओं की पूजा की जाती है। इसलिए कन्याओं की रक्षा करने के साथ उन्हें शिक्षित करें जिससे समाज और देश प्रगति पर चले। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को धार्मिक भजनों पर नृत्य करते व जयकारे लगाते हुए भी देखा गया। कथा का वाचन करते हुए पंडित जी  ने कहा कि, भागवत कथा सुनना और भगवान को अपने मन में बसाने से व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आता है। भगवान हमेशा आपने भक्त को पाना चाहता है। जितना भक्त भगवान के बिना अधूरा है उतना ही अधूरा भगवान भी भक्त के बिना है। भगवान ज्ञानी को नही अपितु भक्त को दर्शन देते हैं। और सच्चे मन से ही भगवान प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे।

उन्होंने कहा जो भगवान से कुछ नहीं मांगते भगवान ऐसे भक्तों की समस्या को तुरंत दूर करते हैं अेसा ही सुदामा के साथ हुआ जब उसकी पत्नी ने सुदामा को कहा कि भगवान आपके मित्र हैं तो आप उनके पास जाइए और उनसे अपने गरीबी दूर करने की कृपा मांगे भगवान सुदामा को भगवान को देने के लिए उसकी पत्नी ने चावल पोटली में बांधकर दिया। और जब सुदामा भगवान के पास पहुंचे तो सुदामा अपने ईश्वर से कुछ भी मांग नहीं किया। लेकिन भगवान उनकी परेशानी समझ लिए और समस्या तुरंत हल कर दिए।श्री कृष्ण नंदन महाराज ने कथा विस्तार करते हुए कहा कि भगवान को कलयुग में पाने का सबसे सरल माध्यम है उसका भजन और कीर्तन लेकिन भगवान को पाने वाला व्यक्ति हमेशा संतोषी होना चाहिए जो कुछ दिया है उसे भगवान का दिया मानकर उसी में संतोष करना चाहिए कभी किसी की निंदा में नहीं रहनी चाहिए केवल ईश्वर के गुणों का ही गाना चाहिए और ऐसे ही जीव भगवान को प्यारे होते हैं और वही जो परमात्मा को प्राप्त कर सकता है जो हमेशा दीन दुखियों की सेवा करता है संतोष से रहता है और भगवान नाम का कीर्तन करते रहता है। कथा श्रवण करने प्रमुख रूप से श्रीमती दुर्गा वर्मा, कुमारी नेहा वर्मा, मुख्य यजमान अनिरुद्ध वर्मा, रामेश्वरी वर्मा, श्याम वर्मा, राधा वर्मा, मीरा वर्मा, लीलावती, कांति , महावीर, अनिता, भूपेंद्र वर्मा, कुमुद वर्मा, संतोष वर्मा, अन्नू वर्मा, संजय, लता, धर्मेंद्र, प्रभा, चुम्मन, हेमलता वर्मा, रिया वर्मा, एकांश वर्मा, आदिति वर्मा, आदि वर्मा सहित ग्रामीण मौजूद रहे।