दुर्ग। महिला एवं बाल विकास विभाग में पदस्थ -जिला परियोजना अधिकारी पर 10 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। आरोपी रचिता नायडू ने दुर्ग शहरी सीडीपीओ रहते युवती से घरेलू संबंध बनाए। बिलासपुर में बाल संरक्षण अधिकारी की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। एवज में युवती से उसकी मां के सोने के गहने गिरवी रखवाकर 10 लाख रुपए काले लिए।


नौकरी नहीं लगने पर जब पीड़िता ने पैसा मांगा तो उसे रायपुर टीआई के नाम से धमकी देने लगी। शिकायत पर दुर्ग कोतवाली पुलिस ने रचिता और दिनेश राय के खिलाफ 318(4), 3(5) के तहत केस कर जांच में लिया है। रचिता अभी अभनपुर में पदस्थ है। मामले में वार्ड 3 मठपारा दुर्ग निवासी श्वेता जांगिड (24 वर्ष) ने रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रार्थिया ने पुलिस को बताया कि परियोजना अधिकारी रचिता नायडू से मेरी कुछ समय पहले जान पहचान हुई थी। घर आना-जान था। बातों-बातों में उसके पूछने पर मैंने बता दिया कि मां ने मेरी शादी के लिए सोना लेकर रखा है। कुछ दिनों बाद रचिता ने बताया कि बिलासपुर जिला बाल संरक्षण अधिकारी की वेकेंसी निकली है। 10 दिन के बाद उसने कहा कि वह मेरी नौकरी लगवा देगी, लेकिन 5 लाख रुपए देने होंगे। मां ने इंकार कर दिया। इस पर रचिता ने किसी से बात कराई। रचिता ने मेरे मामा को भी भरोसे में लिया। मेरी मां ने गहने गिरवी में रखकर 5 लाख रुपए जुटाए, जिसे रचिता 17 दिसंबर 2024 को घर से ले गई। 3-4 महीने बाद उसने कॉल कर 16 लाख और मांगे। मैंने हाथ खड़े कर दिए तो रचिता ने दिनेश राय नाम के व्यक्ति से बात कराई। मैंने मां के गहने गिरवी रखकर 21 मई 2025 को रचिता के रायपुर स्थित घर जाकर दे दिए। 21 जुलाई को पता चला कि 23 जुलाई को होने वाले इंटरव्यू लिस्ट में मेरा नाम ही नहीं है। रचिता को कॉल किया तो नंबर ब्लॉक कर दिया। मैं मां के साथ मोवा रायपुर स्थित उसके घर पहुंची। वह नहीं मिली। अगले दिन एक व्यक्ति ने खुद को टीआई रायपुर दिनेश जायसवाल बताकर रचिता के घर के आसपास नहीं दिखने, कॉल न करने और जेल भेजने की धमकी दी।






