पाटन। जनपद पंचायत पाटन में 16वें वित्त आयोग की राशि के आवंटन को लेकर जनपद सदस्यों के बीच असंतोष की चर्चा सामने आई है। सदस्यों की मांग है कि विकास कार्यों के लिए सभी जनपद सदस्यों को समान राशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनके क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर किसी तरह का भेदभाव महसूस न हो।मंगलवार को जनपद पंचायत पाटन परिसर में भाजपा समर्थित कुछ जनपद सदस्य आपस में चर्चा करते नजर आए। चर्चा के दौरान 16वें वित्त की राशि के आवंटन में कम-ज्यादा राशि मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। हालांकि भाजपा और कांग्रेस समर्थित सभी जनपद सदस्यों द्वारा अपनी-अपनी कार्ययोजनाएं जमा किए जाने की जानकारी है, लेकिन राशि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने और कुछ सदस्यों को अपेक्षाकृत कम राशि मिलने की चर्चा से असंतोष बना हुआ है। 1.54 करोड़ की राशि मिलने की चर्चा सूत्रों के अनुसार जनपद पंचायत पाटन को 16वें वित्त आयोग के तहत करीब 1 करोड़ 54 लाख रुपए मिलने की बात सामने आ रही है। हालांकि इस राशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि इसमें से करीब 7 लाख रुपए स्वच्छ भारत मिशन के लिए अलग किए जा चुके हैं। पाटन जनपद पंचायत में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित कुल 25 जनपद सदस्य हैं। चर्चा के मुताबिक भाजपा समर्थित प्रत्येक जनपद सदस्य के क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए करीब 7 लाख रुपए, जबकि कांग्रेस समर्थित सदस्यों के लिए करीब ढाई लाख रुपए की राशि आवंटित किए जाने की बात कही जा रही है। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को अधिक राशि की चर्चा से बढ़ी बेचैनी वहीं अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए अपेक्षाकृत अधिक राशि दिए जाने की चर्चा भी जनपद सदस्यों के बीच असंतोष का कारण बन रही है। खास बात यह है कि असंतोष केवल विपक्षी खेमे तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि भाजपा समर्थित सदस्यों के बीच भी अंदरूनी तौर पर समान आवंटन को लेकर सवाल उठने की चर्चा है। पूरे मामले का मूल सवाल यही है कि क्या 16वें वित्त की राशि का आवंटन सभी जनपद सदस्यों के क्षेत्रों में समान आधार पर किया जा रहा है, या राजनीतिक समर्थन और पद के आधार पर राशि में अंतर है? यदि राशि में अंतर है तो उसका आधार और मापदंड क्या है, इसे लेकर भी सदस्यों के बीच स्पष्टता की जरूरत महसूस की जा रही है। वित्त आयोग की राशि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन होती है। ऐसे में राशि के आवंटन में पारदर्शिता और स्पष्ट मापदंड न केवल सदस्यों के असंतोष को दूर करने के लिए जरूरी हैं, बल्कि क्षेत्रीय विकास को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब देने के लिए भी आवश्यक हैं। केंद्र और राज्य स्तर पर 15वें व 16वें वित्त आयोग की राशि पंचायतों के विकास कार्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा है। अब निगाह इस बात पर है कि जनपद पंचायत पाटन द्वारा अंतिम रूप से किस सदस्य के क्षेत्र में कितनी राशि स्वीकृत की जाती है और उसके लिए क्या मापदंड तय किए जाते हैं।







