प्रदेश का पहला प्लास्टिक पार्क दो महीने में पूरा होगा, चार नए स्मार्ट इंडस्ट्रीयल एरिया की होगी शुरुआत

रायपुर।छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने मंत्रालय महानदी भवन में विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि रायपुर के उरला में 39 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे प्रदेश के पहले प्लास्टिक पार्क का निर्माण कार्य 30 अक्टूबर 2025 तक हर हाल में पूर्ण किया जाए।

बैठक में मंत्री ने प्रदेश में प्रस्तावित चार नए स्मार्ट इंडस्ट्रीयल एरिया का काम शीघ्र शुरू करने पर जोर दिया। इनमें जांजगीर-चांपा जिले के सीलादेही बिर्रा, राजनांदगांव के बीजेतला, नवा रायपुर में फार्मास्युटिकल पार्क और बस्तर जिले के नियानार शामिल हैं। मंत्री ने रजिस्ट्रार फर्म एवं संस्थाओं के कामकाज की समीक्षा करते हुए अपेक्षित प्रगति न होने पर नाराजगी जताई। शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करने और पैसों के लेनदेन से जुड़ी गड़बड़ियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लापरवाही सामने आने पर निलंबन की कार्रवाई होगी।

कोरबा में प्रस्तावित एल्युमिनियम पार्क को लेकर मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बंद हो चुके विद्युत संयंत्र की जमीन को जल्द से जल्द उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि पार्क की स्थापना का कार्य शुरू हो सके। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हालिया जापान और दक्षिण कोरिया दौरे से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति को वैश्विक पहचान मिली है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और रायपुर में आयोजित निवेशक सम्मेलनों के माध्यम से अब तक 6.65 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। प्रदेश में लागू नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 से औद्योगिक माहौल बेहतर हुआ है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।

ऑनलाइन भू-आबंटन और निरीक्षण की समीक्षा
मंत्री ने भू-आबंटन के ऑनलाइन आवेदनों की समीक्षा करते हुए कहा कि निर्धारित समय में उद्योग स्थापित न करने वाले प्रकरणों में नोटिस देकर भू-निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए। फ्री-होल्ड भूमि का व्यावसायिक उपयोग न होने पर भी गहन परीक्षण के निर्देश दिए। बैठक में औद्योगिक विकास नीति से जुड़ी अनुदान, छूट और रियायतों की प्रगति, बकाया वसूली, औद्योगिक पार्कों की स्थापना और भू-आबंटन की स्थिति पर चर्चा हुई। इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार सृजन योजना, माइक्रो फूड प्रोसेसिंग, विश्वकर्मा कौशल विकास योजना और अन्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।