शहीद आजाद के सहयोगी सुखदेव राज की प्रतिमा जर्जर हाल में, जमीन पर भी कब्जा




संजय कुमार साहू/अंडा।  अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के सहयोगी क्रांतिकारी सुखदेव राज का दुर्ग से नाता रहा है। सुखदेव राज ने आखिरी के 10 साल दुर्ग शहर, और गांव अण्डा में रहकर कुष्ठ रोगियों की सेवा करते गुजारे थे। उनकी स्मृतियों को बनाए रखने के लिए पेंशनर महासंघ को संघर्ष करना पड़ रहा है। जिस गांव में उनकी प्रतिमा स्थापित है, वह जर्जर हालत में हैं। वहां जमीन पर कब्जा हो चुका है। यही नहीं, दुर्ग शहर के जिस जगह पर वो कुष्ठ रोगियों का इलाज करते थे वहां नगर निगम ने मल्टी स्टोरी कॉम्पलेक्स निर्माण की योजना बनाई है।
       इसके बाद सुखदेव राज अलग-अलग जगहों पर रहे, और फिर 1963 में दुर्ग आ गए। सुखदेव राज की स्मृतियों को बचाए रखने के लिए लड़ाई लड़ रहे दुर्ग संभाग के पेंशनर महासंघ के संभागीय अध्यक्ष बीके वर्मा ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में बताया कि क्रांतिकारी सुखदेव राज आचार्य विनोबा भावे के संपर्क में आए, और फिर दुर्ग में कुष्ठ रोगियों की सेवा में जुटे रहे।
        सुखदेव राज का 1973 में देहांत हुआ। उनके गुजरने के बाद ग्राम अण्डा में प्रतिमा स्थापित किया गया। इसका उद्घाटन 1976 में तत्कालीन सीएम श्यामाचरण शुक्ल ने किया। इस दौरान शहीद भगत सिंह के भाई भी मौजूद थे। ग्राम अण्डा में आश्रम भी था, और करीब साढ़े 3 एकड़ जमीन भी थी जो कि कब्जा हो चुका है।
        यही नहीं, जिस स्थान पर क्रांतिकारी सुखदेव राज की प्रतिमा स्थापित है, वहां दीवार खड़ी कर दी गई है, और जमीन कब्जा कर लिया गया है। दुर्ग शहर के इंदिरा मार्केट के पास सुखदेव राज कुष्ठरोगियों की सेवा करते थे वहां जर्जर भवन को तोडक़र मल्टी स्टोरी पार्किंग बनाने की योजना है।
       क्रांतिकारी सुखदेव राज, अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह के साथी थे। शहीद भगत सिंह के साथ क्रांतिकारी सुखदेव को फांसी हुई थी। इससे परे सुखदेव राज, अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के साथ थे, और 1931 को भी अंग्रेजों के साथ मुठभेड़ से पहले आजाद के साथ प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में बैठे थे।
बताया जाता है कि आजाद को अपनी घेराबंदी का अहसास हुआ तो उन्होंने सुखदेव राज को तुरंत वहां से रवाना कर दिया। सुखदेव राज किसी तरह बचकर निकल गए, लेकिन आजाद, अंग्रेजों के साथ मुठभेड़ के बाद खुद को गोली मारकर मौत को गले लगा लिया।
श्री वर्मा ने बताया कि क्रांतिकारी सुखदेव राज की
पुत्री, जो कि दिल्ली में निवासरत हैं, वो डेढ़-दो साल
पहले दुर्ग आई थीं, और ग्राम अण्डा भी आई थीं।
पेंशनर महासंघ लगातार क्रांतिकारी सुखदेव राज की
स्मृतियों को बचाए रखने के लिए संघर्षरत है। इस
सिलसिले में सीएम से मुलाकात भी की थी। इसके
अलावा नगर निगम की मेयर इन काउंसिल में
सुखदेव राज की प्रतिमा लगाने और भवन का
जीर्णोद्धार कर स्मारक के रूप में विकसित करने का
प्रस्ताव भी पारित किया था। मगर वर्तमान में फिर
मल्टी स्टोरी पार्किंग की रूपरेखा बनाई जा रही है।
इसका पेंशनर महासंघ और अन्य संगठनों ने विरोध
किया है। इस पूरे मामले पर ‘छत्तीसगढ़’ ने दुर्ग की
मेयर श्रीमती अलका बाघमार से चर्चा की। मेयर ने
बताया कि क्रांतिकारी सुखदेव राज की प्रतिमा
स्थापित करने के मसले पर एक बार चर्चा हो चुकी
है। मगर इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। अभी
वर्तमान में क्या स्थिति है, यह तो वो फाइल देखकर
ही बता पाएंगी। बहरहाल, पेंशनर महासंघ जनसंगठनों के सहयोग लेकर क्रांतिकारी सुखदेव राज की स्मृतियों को स्थाई रखने के लिए प्रयासरत हैं।