पाटन। पाटन तहसील में इन दिनों राजस्व व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी होती नजर आ रही है। मुख्य तहसीलदार पवन ठाकुर के दुर्ग तबादला होने के बाद उनकी जगह अब तक किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं किए जाने से आम जनता की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। अधिकारी के स्थानांतरण के बाद प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की, यह सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

तहसील कार्यालय में राजस्व प्रकरणों की फाइलें धूल फांक रही हैं और आवेदक अपने काम के लिए कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा सहित अन्य राजस्व मामलों के निराकरण में देरी से लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

कुर्सी खाली, जनता बेहाल

मुख्य तहसीलदार के स्थानांतरण के बाद उनकी जगह किसी अधिकारी की पदस्थापना नहीं होने से तहसील की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूर-दराज के गांवों से लोग उम्मीद लेकर तहसील कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी के अभाव में उन्हें कभी इस टेबल तो कभी उस टेबल भटकना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पाटन तहसील में बड़ी संख्या में राजस्व प्रकरण लंबित हैं, तो अधिकारी के स्थानांतरण के बाद तत्काल नई पदस्थापना क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन को आम जनता की परेशानी नजर नहीं आ रही है?
फाइलों का बढ़ता अंबार, बढ़ती जा रही लोगों की बेचैनी
एक ओर शासन आम जनता को त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे करता है, वहीं पाटन तहसील में अधिकारी के अभाव ने इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फाइलें बढ़ रही हैं, तारीखें बढ़ रही हैं और लोगों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है।
राजस्व प्रकरणों के समय पर निराकरण नहीं होने से लोगों के जरूरी काम अटक रहे हैं। कई आवेदकों को एक छोटे से काम के लिए बार-बार तहसील कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है।
प्रशासन कब जागेगा?
पाटन तहसील में तहसीलदार की कुर्सी खाली होने के बावजूद अब तक स्थायी अथवा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। क्या किसी अधिकारी की पदस्थापना के लिए भी आम जनता को आंदोलन या शिकायत का सहारा लेना पड़ेगा?
अब लोगों की नजर प्रशासन पर है कि पाटन तहसील को तत्काल तहसीलदार मिलेगा या राजस्व प्रकरणों की फाइलों का अंबार यूं ही बढ़ता रहेगा। प्रशासन को जल्द से जल्द व्यवस्था दुरुस्त कर लंबित मामलों का निराकरण सुनिश्चित करना होगा, वरना जनता की नाराजगी और बढ़ सकती है।






