सदा सदा के लिए खो गई मंदराजी फ़िल्म के इस्पेक्टर मुकेश पिपरिया की आवाज
,,, अंतिम यात्रा में पहुंचे कला जगत की महान हस्तियां
,,, उभरते छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार के निधन पर जताया शोक

अंडा।गांव की रामायण मंडली और लीला मंडली से अपनी कला यात्रा शुरू करने वाले, अपनी कला के बल पर बड़ी बड़ी सांस्कृतिक संस्थाओं में अपनी पहुंच बनाने वाले, अपनी प्रतिभा के दम पर छत्तीसगढ़ी फिल्मों में स्थान बनाने वाले, मंदराजी फिल्म के इंस्पेक्टर मुकेश पिपरिया की आवाज अब सदा सदा के लिए खो गई है। उनके निधन को कला जगत ने अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा है कि वे एक ऐसे कलाकार थे जो सभी भूमिकाओं को निभाने में पारंगत थे। तबला वादक से अपनी कला यात्रा शुरू करने वाले मुकेश पिपरिया जीवन के अंतिम क्षण तक कई विधाओं में निपुण हो गए थे।
बालोद जिले के ग्राम कोड़ेवा निवासी मुकेश पिपरिया का जीवन उथल-पुथल भरा रहा है। बचपन से लेकर अब तक उन्होंने संघर्ष मय जीवन जिया है। जीवन में कई कठिनाइयां आने के बावजूद वे हर कदम पर कुशलतापूर्वक आगे बढ़ते गए। 51 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वे ना केवल सफल व्यवसाई माने जाने लगे थे, बल्कि कला के क्षेत्र में उन्होंने एक नई ऊंचाई को छू ली थी। ग्राम कोडेवा के लोग बताते हैं कि वे बचपन से ही कला के प्रति रुचि रखते थे गांव की रामायण मंडलियों में वे तबला बजाते थे गांव की महिला मानस मंडली को उन्होंने अपने तबला वादन के बल पर छत्तीसगढ़ की कई जगहों पर प्रमुख स्थान दिलाने में सफलता पाई थी। वही गांव की लीला मंडली और गांव की सांस्कृतिक संस्था में भी वह ना केवल तबला वादन करते थे बल्कि कई पात्रों में भूमिका भी निभाते थे।
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बड़ी-बड़ी सांस्कृतिक संस्थाओं में निभाई भूमिका

मुकेश पिपरिया की कला को नजदीक से देखने और परखने वाले प्रसिद्ध बांसुरी वादक, छत्तीसगढ़ी फिल्मों के संगीत निदेशक व रंग झरोखा के संचालक दुष्यंत हरमुख ने बताया कि मुकेश पिपरिया एक ऐसे कलाकार थे जिनकी मांग हर बड़ी संस्थाओं में रहती थी। झुमुक देवांगन की संस्था छत्तीसगढ़ महतारी में उन्होंने सबसे पहले तबला वादन का काम किया। वहीं से उसकी एक नई पहचान बनी। उसके बाद प्रेम चंद्राकर व ममता चंद्राकर कृत चिन्हारी में काफी समय तक वे रहे। उसके बाद रंग झरोखा में उन्होंने ना केवल तबला वादन में संस्था को एक नई ऊंचाई दी, बल्कि कई प्रमुख पात्रों की भूमिका भी वे सहज निभा लेते थे। बहुत ही कम समय में उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्मों में भी अपनी जगह बना ली थी। मंदराजी फिल्म में उनकी इंस्पेक्टर की भूमिका बहुत ही प्रभावशाली है।
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अनेक हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
कलाकार मुकेश पिपरिया की अंतिम यात्रा 10 मई को ग्राम कोलिहापुरी में निकाली गई। उनके अंतिम यात्रा में जहां अनेक लोग शामिल हुए वहीं कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। इनमें प्रसिद्ध बांसुरी वादक दुष्यंत हरमुख, गोविंद साव, राकेश देशमुख, तरुण निषाद, हेमलाल कौशल, नवीन देशमुख, शंकर साहू, होमेंद्र ठाकुर, युगल साहू, उमेंद्र सिन्हा, राकेश साहू, परमेश्वर साहू, भूंसू यादव, सतीश सिन्हा सहित दिल्लीवार कुर्मी क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र हरमुख, महामंत्री अशोक कुमार देशमुख, केशव बंटी हरमुख, उपाध्यक्ष यशवंत दिल्लीवार, कोषाध्यक्ष मिलाप देशमुख, केंद्रीय महिला अध्यक्ष प्रीती देशमुख, युवा अध्यक्ष योगेश्वर देशमुख, निरेश पिपरिया,शेखर हरमुख, जीतू देशमुख आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।