जो पूरे गांव को राशन बांटते हैं, उनके घरों में राशन के लाले, पांच माह से नहीं मिला कमीशन, आर्थिक तंगी से जूझ रहे राशन दुकान संचालक

पाटन। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत ग्रामीणों तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले राशन दुकान संचालक, महिला स्व-सहायता समूह और सेल्समैन स्वयं आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। पाटन विकासखंड की 114 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में राशन वितरण कार्य से जुड़े लोगों को पिछले पांच माह से कमीशन का भुगतान नहीं होने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई दुकानों में कार्यरत सेल्समैनों को भी मेहनताना नहीं मिल पाया है, जिससे उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।

जानकारी के अनुसार, राशन दुकानों का संचालन अधिकांश स्थानों पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जाता है। इन समूहों के सदस्य और दुकानों में नियुक्त सेल्समैन नियमित रूप से खाद्यान्न वितरण, स्टॉक का रखरखाव, रिकॉर्ड संधारण तथा कार्डधारियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं। इसके बावजूद उन्हें समय पर कमीशन नहीं मिलने से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।

कई दुकानों में वर्षों से लंबित है भुगतान

राशन दुकान संचालकों का कहना है कि केवल मासिक राशन वितरण का कमीशन ही नहीं, बल्कि वर्ष 2022 से पूरक पोषण आहार, आंगनबाड़ी केंद्रों को चावल वितरण, मध्याह्न भोजन योजना के लिए चावल वितरण तथा अमृत नमक वितरण से संबंधित कमीशन का भुगतान भी अब तक नहीं किया गया है। ब्लॉक की लगभग एक दर्जन दुकानों में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है, जहां वर्षों से विभिन्न मदों का भुगतान लंबित है।

शासन का दबाव, लेकिन भुगतान पर ध्यान नहीं

दुकान संचालकों का कहना है कि शासन-प्रशासन की ओर से राशन वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाती। समय पर खाद्यान्न वितरण, स्टॉक का सही रखरखाव, ऑनलाइन एंट्री, कार्डधारियों की ई-केवाईसी, शिकायतों का निराकरण और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर लगातार दबाव रहता है। अधिकारियों द्वारा नियमित समीक्षा और निरीक्षण भी किए जाते हैं।

संचालकों का कहना है कि वे सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन उनके मेहनताने और कमीशन के भुगतान को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इससे समूहों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और कई जगहों पर सेल्समैनों को भुगतान करना भी मुश्किल हो गया है।

परिवार चलाना हो रहा मुश्किल

कमीशन नहीं मिलने के कारण कई राशन दुकान संचालकों और सेल्समैनों के सामने रोजमर्रा के खर्चों का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि राशन दुकान से मिलने वाले कमीशन पर ही उनकी आजीविका निर्भर है। लगातार भुगतान लंबित रहने से कर्ज लेने की नौबत आ गई है।

भुगतान की मांग

राशन दुकान संचालकों, महिला स्व-सहायता समूहों और सेल्समैनों ने शासन से लंबित कमीशन राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों और समूहों की आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर लंबित भुगतान जारी कराने की मांग की है।