छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण हेतु पशु चिकित्सकों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आरंभ

वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण में सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान का संचार

छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग द्वारा वन्यजीवों के उपचार एवं प्रबंधन के संबंध में पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु ठाकुर प्यारेलाल राज्य प्रशिक्षण अकादमी, निमोरा में तीन दिवसीय आवासीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला 9 से 11 जनवरी 2025 तक आयोजित की जा रही है।

कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव ) श्री सुधीर अग्रवाल द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए वन्यजीव संरक्षण में पशु चिकित्सकों की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए |

अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री प्रेम कुमार ने भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और 2022 में हुए संशोधनों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को निरीक्षण किट की अनिवार्यता और उसके उचित उपयोग की प्रक्रिया पर मार्गदर्शन दिया।

प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं फील्ड डायरेक्टर, उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व, श्रीमती सातोविषा समझदार ने भी प्रतिभागियों से संवाद किया। उन्होंने फील्ड में डीएफओ के रूप में काम करने के दौरान पशु चिकित्सकों द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन में दिए गए अभूतपूर्व सहयोग और उनके योगदान की सराहना की।

कार्यशाला के पहले दो दिनों में नंदनवन जंगल सफारी वेटनेरी ऑफिसर डॉ राकेश वर्मा व विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा वन्यजीवों के स्वभाव, बीमारियों, उपचार, पुनर्वास, और प्रबंधन पर सैद्धांतिक जानकारी प्रदान की जाएगी। अंतिम दिन, प्रतिभागियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण हेतु बारनवापारा भ्रमण कराया जाएगा ।

छत्तीसगढ़ राज्य पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. दीपक चंद्राकर द्वारा इस प्रशिक्षण कार्यशाला का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, जिसे वन विभाग ने स्वीकृत किया। इस पहल का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में पशु चिकित्सकों की दक्षता को प्रभावी बनाना है।

यह कार्यक्रम नंदनवन जंगल सफारी के संचालक सह डीएफओ श्री धम्मशील गणवीर के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।