बलराम यादव
पाटन। जब से धान खरीदी शुरू हुआ है तब से किसान परेशान है। जितनी मेहनत किसानों को धान का उत्पादन करने में लगी लगा उससे कही ज्यादा पसीना टोकन लेने के बहाना पड़ रहा है। आनलाइन टोकन के लिए किसान जब मोबाइल में ऐप खोलते है तो पांच मिनट में ही फूल हो जाता है। समितियों में 30 प्रतिशत टोकन ऑफ लाइन भी दिए जाने का निर्देश है। लेकिन पाटन ब्लॉक के लगभग सभी समितियों में इसका अलग ही उपयोग किया जा रहा है। जब सीजी मितान ने समितियों में जाकर पड़ताल किया तो माजरा कुछ अलग ही नजर आया। किसानों का कहना है कि ऑफलाइन टोकन के लिए काफी लंबा समय दिया जा रहा है। वही जब देर शाम चार से पांच बजे के मध्य समितियों में पहुंचेंगे तो पता चलेगा कि आखिर ऑफलाइन टोकन कैसे और किसे दिए जा रहे है। सीजी मितान ने पाटन ब्लॉक के आधा दर्जन समिति में चार से पांच बजे के मध्य दबिश दिया। जिसमें देखने को मिला कि समितियों में दिन भर गायब रहने वाले प्राधिकृत अध्यक्ष पहुंचते है। उसके आने के कुछ देर बाद जो उस समिति के ग्रामीण क्षेत्र में धान खरीदने का (कोचिए) का काम करते है वो पहुंचते है। पहले से ही समिति के अंदर कार्यालय में समिति प्रबंधक बैठे रहते है उनसे मुलाकात करते है। फिर कोचिया और समिति के प्रबंधक अपनी जेब से एक एक पर्ची निकालते है। उस पर्ची को समिति प्रबन्धक को दे देते है। किसानों के लिए ऑफलाइन टोकन बहुत मुश्किल से मिलता है वही टोकन शाम तक जारी हो जाता है। इस तरह से आफ लाइन टोकन काटा जा रहा है।







