ग्राम सेलूद में स्वयंसेवकों ने पेड़ों को बांधी राखी – वृक्ष संवर्धन का लिया अनोखा संकल्प


सेलूद/भाई-बहन के पवित्र स्नेह और अटूट रक्षा का पर्व ‘रक्षाबंधन’ ग्राम सेलूद (सेलूद मंडल) में एक अत्यंत प्रेरक और अनुकरणीय पहल का साक्षी बना। इस पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सेलूद मंडल के स्वयंसेवकों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए गांव के प्रमुख वृक्षों को रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उनके संवर्धन, देखरेख और सुरक्षा का दृढ़ संकल्प लिया l पौधा लगाना आसान, लेकिन उसे पेड़ बनाना ही असली कर्तव्य l कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने समाज को एक कड़ा और सोचने पर मजबूर कर देने वाला संदेश दिया l वास्तविकता यह है कि किसी छोटे पौधे को एक विशाल, फलदायी पेड़ बनने में बरसों की कड़ी मेहनत, निरंतर देखरेख और रखरखाव की आवश्यकता होती है। देखभाल के अभाव में कई पौधे समय से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। इस प्रवृत्ति को बदलने के लिए सेलूद के स्वयंसेवकों ने यह संकल्प लिया कि वे केवल पौधे लगाएंगे ही नहीं, बल्कि उनके पेड़ बनने तक उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे और पर्यावरण संरक्षण में अपना निरंतर योगदान देंगे l प्रकृति रक्षा का महासंकल्प – आमतौर पर रक्षाबंधन का त्यौहार बहन द्वारा भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर अपनी सुरक्षा का वचन लेने का प्रतीक माना जाता है। लेकिन सेलूद मंडल के स्वयंसेवकों ने इस परंपरा का विस्तार करते हुए प्रकृति को भी अपने परिवार का हिस्सा माना। स्वयंसेवकों ने वृक्षों की विधिवत पूजा-अर्चना की, उन्हें रक्षासूत्र बांधा और जीवनभर उनके संरक्षण का वचन दिया। रमेश देवांगन ने विचार व्यक्त किया कि मानव जीवन में वृक्षों का अपरिहार्य महत्त्व – पर्यावरण संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए स्वयंसेवकों ने बताया कि प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना भी असंभव है l योगेश सोनवानी ने कहा कि प्राणवायु और शुद्ध वातावरण – वृक्ष हमें मुफ़्त ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर हवा को शुद्ध बनाते हैं l जलवायु संतुलन और वर्षा: जल चक्र को बनाए रखने, वैश्विक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) को नियंत्रित करने और समय पर वर्षा कराने में वनों की मुख्य भूमिका होती है। जयन्त साहू ने कहा कि मृदा अपरदन पर रोक – पेड़ अपनी जड़ों से मिट्टी को मजबूती से बांधकर रखते हैं, जिससे भू-क्षरण रुकता है और भूमि की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है। जय प्रकाश साहू ने कहा कि जीवन का आधार: फल, फूल, औषधि और शीतल छाया प्रदान कर वृक्ष निस्वार्थ भाव से समस्त जीव जगत का पोषण करते हैं। विकास बारले ने विचार व्यक्त किया कि एक प्रेरणादायक संदेश और समाज से अपील – सेलूद के स्वयंसेवकों की इस दूरदर्शी और संवेदनशील पहल ने संपूर्ण क्षेत्र के लिए एक नई मिसाल कायम की है। खेमलाल साहू ने कार्यक्रम के अंत में समस्त ग्रामीणों, युवाओं और समाज के हर वर्ग से भावुक अपील की गई कि केवल फोटो खिंचवाने के लिए पौधा न लगाएं, बल्कि उस पौधे को अपने बच्चे की तरह पालकर बड़ा करने की जिम्मेदारी लें। रक्षाबंधन पर हम सब भी संकल्प लें कि प्रकृति की रक्षा में अपना सक्रिय योगदान देंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक हरा-भरा और सुरक्षित भविष्य सौंपेंगे। उक्त अवसर पर खेमलाल साहू, रमेश देवांगन, योगेश सोनवानी, जयप्रकाश साहू, शुभम सोनवानी, भावेश यदु, वंश देवांगन, जयदीप साहू, विकास बारले, नितिन साहू, भावेश साहू की उपस्थिति रही l