*बलराम यादव*

पाटन।दक्षिण पाटन क्षेत्र के लिए राहत और खुशी की बड़ी खबर सामने आई है। तांदुला सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग क्रमांक 1 के अंतर्गत आने वाले गांवों के तालाब अब लबालब भर गए हैं, जिससे निस्तारी का संकट पूरी तरह समाप्त हो गया है।
कलेक्टर एवं सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन और सतत मार्गदर्शन में विभाग के मैदानी अमले ने दिन-रात मेहनत कर यह उपलब्धि हासिल की। सिपकोंहा माइनर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे टीम ने दृढ़ संकल्प से पूरा किया।
विशेष रूप से भंसुली, जरवाय, बोरेंडा और कौहि जैसे अंतिम छोर के गांवों के तालाबों तक पानी पहुंचाना बड़ी सफलता मानी जा रही है। करीब 51 किलोमीटर की दूरी तय कर पानी लाकर दक्षिण पाटन क्षेत्र के 112 तालाबों को भरा गया, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
इस दौरान पानी की चोरी रोकने के लिए सिंचाई विभाग के उपयंत्री को सख्त कदम उठाने पड़े। नहर में अवैध रूप से पंप लगाकर पानी खींच रहे आधा दर्जन लोगों के पंप जप्त किए गए, जिसके बाद ही अंतिम छोर तक सुचारु रूप से पानी पहुंच सका।
सिंचाई विभाग के इस सराहनीय कार्य की जनप्रतिनिधियों—अशोक साहू, राजेश ठाकुर, नारद साहू, निर्मल जैन और धनराज साहू—ने खुले दिल से प्रशंसा की है। उन्होंने अधीक्षण अभियंता, एसडीओ, उपयंत्री सहित पूरे स्टाफ को धन्यवाद देते हुए इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
अब क्षेत्र के तालाबों में पानी भर जाने से न केवल निस्तारी की समस्या दूर हुई है, बल्कि आने वाले समय में खेती-किसानी और जल संरक्षण को भी बड़ा बल मिलेगा।






