पंडरिया-एक तरफ पूरी दुनियां में जल संग्रहण का कार्य चल रहा है,वहीं सिंचाई विभाग पंडरिया जल व्यर्थ बहाने की आदत से बाज नहीं आ रहा है।हर वर्ष इस तरह पानी नाले में बहाने का कार्य सिंचाई विभाग द्वारा किया जाता है।नगर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित क्रांति जलाशय के पानी को हरिनाले में बहाया जा रहा है।जबकि पानी छोड़े जाने की आवश्यकता नहीं है।पिछले चार दिनों से जलाशय के मुख्य गेट से पानी बहाया जा रहा है।
क्षेत्र के एक मात्र क्रांति जलाशय का पानी 4 दिन से व्यर्थ बह रहा है।विभाग के कर्मचारी व कुछ लोगों के मिलीभगत से यह पानी बह रहा है। जलाशय के गेट के आगे कांक्रीट को तोड़कर पानी बहाया जा रहा है।जबकि कांक्रीट के नाली का निर्माण हाल में ही किया गया था।उक्त जलाशय के चलते आस-पास के गांव सगौना व रहमान कापा में पानी का स्तर बना रहता है।लेकिन अनावश्यक पानी बहाने से जलाशय गर्मी तक सुख जाएगा।जिसके चलते लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ेगा।गर्मी के दिनों में क्षेत्र के कई गांव में पेयजल के लिए तरसते हैं,वहीं दूसरी तरफ जलाशय के पानी को व्यर्थ ही बहाया जा रहा है। इसे तत्काल बंद नहीं किया गया तो बांध का पानी खाली हो जायेगा।बताया जा रहा है कि मछली पकड़ने के लिए तथा बांध खाली कर डुबान क्षेत्र में खेती करने के लिए बांध के पानी को खाली किया जाता है।विभाग इसमे सहयोग प्रदान करता है।ग्रामीण अजय पन्द्राम, रमेश पन्द्राम,सोन सिंह,रामस्वरूप यादव सहित अनेक ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष इस तरह व्यर्थ ही पानी को बहाया जाता है,हर वर्ष इस प्रकार जलाशय को खाली किया जाता है।उन्होंने बताया कि इस प्रकार से कई बार बांध को अनावश्यक खोल दिया जाता है ,जिससे भारी जल राशि बर्बाद हो जाती है।उन्होंने बताया कि जरूरत के समय बांध से पानी नहीं दिया जाता जबकि अभी कोई कार्य नहीं है ,इसके बावजूद पानी को बहाया जा रहा है।बांध खाली होने के कारण रहमान कापा सहित आस-पास के गांवों के ट्यूब वेल के जल स्तर घट जाता है।बांध से पानी बहाने के सिलसिले पर रोक लगनी चाहिए।उन्होंने बताया कि इसमें सिचाई विभाग के कर्मचारी भी संलिप्त रहते हैं।
*ठेकेदार के लिए भी खोले जाते हैं जलाशय के गेट*- क्रांति जलाशय में नाली निर्माण,पुलिया निर्माण का कार्य चल रहा है।जिसके निर्माण के लिए पानी की व्यवस्था करना ठेकेदार की जिम्मेदारी है।बताया जाता है कि इस निर्माण कार्यों के लिए सिचाई विभाग पंडरिया के कर्मचारियों द्वारा जलाशय का गेट खोलकर उन्हें पानी बेचा जाता है।नहर को काटकर कहीं भी पानी बहा दिया जाता है।विभाग द्वारा पानी बहते हुए देखकर जानबूझकर अनदेखा कर दिया जाता है।साथ ही नहर को काटने पर भी किसी प्रकार कार्यवाही नहीं करता है।







