रायपुर। 12 अगस्त से पूरे प्रदेश में वर्षा की गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है।
13 अगस्त ,2025 के आसपास बंगाल की खाड़ी के उत्तर- पश्चिम और उसे सटे पश्चिम- मध्य में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है ।
12 अगस्त से 15 अगस्त तक दक्षिण छत्तीसगढ़ में एक-दो बार भारी वर्षा होने की संभावना है, 13 और 14 अगस्त को एक दो स्थानों पर अति भारी वर्षा होने की संभावना है।
महत्वपूर्ण मौसम की विशेषताएं एवं सिनॉप्टिक स्थितियां
औसत समुद्र तल पर मानसून द्रोणिका अमृतसर, चंडीगढ़ ,शाहजहांपुर ,लखनऊ, गोरखपुर, दरभंगा जलपाईगुड़ी और वहां से पूर्व- उत्तर- पूर्व की ओर अरुणाचल प्रदेश तक स्थित है ।
उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और समीप भारती तेलंगाना के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवर्ती परिसंचरण समुद्र तल से 3.1 और 5.8 किलोमीटर ऊपर ऊंचाई के साथ दक्षिण की ओर झुका हुआ है ।
मौसम सारांश
पिछले 24 घंटे में छत्तीसगढ़ की कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई कुछ जिले शुष्क रहे ।
बलरामपुर जिले में सर्वाधिक वर्षा 58.0 मिलीमीटर कुसुमी में दर्ज की गई ।
प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में तथा सबसे न्यूनतम का तापमान 22.02 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया।
अगले 5 दिनों का तापमान दृष्टिकोण
छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होंगे, तत्पश्चात गिरावट की संभावना है।
अगले 24 घंटे का रायपुर शहर का पूर्वानुमान
आज 12 अगस्त को आकाश आशिक मेघमय रहने तथा गरज चमक के साथ बौछार पड़ने की संभावना है अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 34 डिग्री सेल्सियस और 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है ।
प्रभाव एवं आवश्यक कार्यवाही
1 मेघ गर्जन ,वज्रपात और ओला
2 गड़गड़ाहट सुनने के बाद घर के अंदर जाएं या सुरक्षित पक्के आश्चर्यों में रहे ।
3 अगर कोई आश्रय उपलब्ध नहीं हो तो तुरंत उखड़ू बैठ जाएं ।
4 घास -फूस की झोपड़ी और एसबेस्टस की छत वाले घरों को नुकसान। घर के छत पर उड़ सकते हैं।
5 अधूरे बंधे धातु की चादर उड़ सकती हैं ।
6 पेड़ के नीचे आश्रय ना ले ।
7 बिजली /इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग ना करें
8 बिजली के लाइनों से दूर रहे ।
9 कुछ मंडियों में खुले में रखे हुए उत्पादों को भींगने से बचने के लिए सुरक्षित स्थान पर भंडार करें ।
ओलावृष्टि के दुष्प्रभाव से बचने के लिए बागवानी एवं सब्जी की फसलों में उपलब्धता के आधार पर एंटी हेल मेट का उपयोग करें।
भारी वर्षा के संभावित प्रभाव
स्थानीयकृत भूस्खलन /लैंडस्लाइड
बाढ़ के कारण कुछ क्षेत्रों में बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान।
नदी जल ग्रहण क्षेत्रों में बाढ़ आ सकती है







