जब टीचर ने क्लास में सबके सामने कहा साइंस के बाद आर्ट्स ले रहे हो, तुम क्लास में आते भी नही, कभी पास नही हो सकता, इसी बात को लिया चैलेंज, पास भी हुआ आज है सफल व्यापारी, पढ़िए रानितराई के सरपंच निर्मल जैन की यह यादें


पाटन। ग्राम रानितराई सरपंच निर्मल जैन ने शिक्षक दिवस पर अपनी स्कूल जीवन की यादें को साझा करते हुए बताया कि वह लक्ष्मी बाई शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में अध्ययन कर रहा था उसे समय की यादें साझा करते हुए सीजी मितान को बताया कि उसे समय तात्कालिक टीचर के रूप में श्रीमती प्रमिला चंद्राकर स्कूल में पढ़ा रहे थे और वह दसवीं उत्तीर्ण होने के बाद कलासंकाय एवं विज्ञान संकाय में प्रवेश लेने में दुविधा हो रही थी। तब निर्मल जैन कला संकाय को चयन किया लेकिन उसे स्कूल के प्राचार्य एवं निर्मल जैन के पिताजी ने मिलकर उसे विज्ञान संकाय में भर्ती कर दिया। इसके बाद 1 साल हुए कक्षा ग्यारहवीं में फेल हुए तो वह स्वयं कला संकाय में अपना प्रवेश ले लिया । क्लास में जब गए वह तब वहां पर पढ़ाने वाली टीचर श्रीमती प्रमिला चंद्राकर ने उनसे कहा कि साइंस संकाय में फेल होने के बाद कला में एडमिशन लिए हो और भी दिक्कत होगी । तुम कभी पास नहीं हो पाओगे और साथ में स्कूल भी रेगुलर नहीं आते। बच्चों के बीच में बोली यह बात निर्मल जैन का मन में बैठ गई उन्होंने उसी समय ठान लिया कि वह इसको एक चैलेंज के रूप में लेंगे और कला संकाय में उत्तीर्ण होकर के दिखाएंगे और इसके बाद उन्होंने उसी टीचर के मार्गदर्शन में खूब मेहनत किया और जब रिजल्ट आया तो परिणाम प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण का रहा। उसके बाद उन्होंने उक्त शिक्षक को जाकर कहा कि यदि उसे दिन उन्होंने उनको यह चैलेंज नहीं दिया होता तो वह आज सफल नहीं हो पाते। आज निर्मल जैन रानीतराई के सरपंच है एवं सफल व्यापारी भी है। और उसके बाद लक्ष्मीबाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कन्या शाला के प्रबंधन समिति के जब निर्मल जैन अध्यक्ष बने तब इस समय श्रीमती प्रमिला चंद्राकर इस स्कूल में प्राचार्य के रूप में कम कर रही थी।। दोनों का यह शिक्षा के क्षेत्र में हुआ कार्य निर्मल जैन के लिए प्रेरणा का काम किया । आज निर्मल जैन सीजी मितान को यह अपना प्रेरणा स्रोत कहानी साझा किया है।