राजनांदगांव
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के युवा छात्र नेता चिंटू सोनकर ने युवाओं की स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संस्कारधानी के नाम लोग बड़े गर्व से लेते हैं और लेना भी चाहिए जहां साहित्यकारों, बेहतर खिलाड़ियों, सफल उद्योगपति एवम् उच्च पदों पर आसीन इसी संस्कारधानी ने दिया है। बावजूद इसके संस्कारधानी में अब युवा नशे, हुक्का बार, शराब, बढ़ते अपराध,गांजा,नशे की अंग्रेजी दवाओं और बढ़ते नशे और जुआ की और आकर्षित होना दुर्भाग्य जनक है और कही न कही संस्कारधानी को शर्मशार कर रही हो। और युवा पीढ़ी अगर डगमगा रही हैं तो और ज्यादा चिंता तो तब है जब शहर में युवा आयोग के अध्यक्ष स्वयं का गृह जिला हो और समूचे प्रदेश में युवाओं को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ने का जिम्मा मिला हो राजनांदगांव संस्कारधानी में लगातार युवाओं का अपराध से संबंध होना नशे की गिरफ्त में होना और जुआ ,सट्टा, क्रिकेट सट्टा की चपेट में जा रहे हो। कहीं ना कहीं युवाओं को लड़खड़ा ने की स्थिति जब निर्मित होकर गुजरने लग रही हो तब युवा आयोग की भूमिका पर सवाल उठना लाजमी है। आखिर क्या कारण है कि युवाओं को युवा आयोग के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी के निर्वहन का दायित्व मिलने के बाद भी युवा नशे अपराध और जुआ सट्टा और वायदा बाजार के सट्टे के जोखिम में फसने के मामले कही न कही सामने आते रहते हैं। राजनांदगांव में युवा आयोग के अध्यक्ष जो राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त है के पद पर रहने के बावजूद अगर लोग नशे की आगोश में अपराध की गतिविधियों में जुआ सट्टा जैसे सामाजिक बुराइयों में अगर जकड़े हुए हैं तो निश्चित रूप से युवा आयोग के दायित्व को बेहतर संभाल पा रहे हैं होंगे ऐसा कहीं से नजर नहीं आता एक भी युवा अगर नशे और अपराध की ओर अग्रसर दिखाई देते हैं तो यह युवा आयोग के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं।







