राज्योत्सव में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हेमंत वर्मा का हुआ सम्मान : ‘मालाबार जायंट स्क्विरल’ की खोज के लिए किया गया सम्मानित

रायपुर।छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के पावन अवसर पर प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण जगत से एक बेहद गौरवशाली खबर सामने आई है। जिला प्रशासन द्वारा बलौदाबाजार जिले के सुप्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर एवं पर्यावरण संरक्षक हेमंत वर्मा को सम्मानित किया गया है।

उन्हें यह सम्मान बर्डिंग (पक्षी संरक्षण), प्रकृति जागरूकता और देवपुर वन परिक्षेत्र में अत्यंत दुर्लभ ‘मालाबार जायंट स्क्विरल’ (विशाल भारतीय गिलहरी) को कैमरे में कैद कर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने के योगदान के लिए दिया गया है।

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट से ‘प्रकृति प्रहरी’ बनने का सफर

मूल रूप से पेशे से साइबर सिक्योरिटी रिस्क ऑडिटर हेमंत वर्मा तकनीक के साथ-साथ प्रकृति के प्रति भी बेहद समर्पित हैं। उन्होंने ‘बर्ड ट्रेल्स’ और ‘ग्रामीण संवाद’ जैसी अनूठी पहलों के जरिए अब तक 200 से अधिक स्थानीय युवाओं को ‘प्रकृति प्रहरी’ के रूप में प्रशिक्षित किया है, जो जंगलों और पक्षियों को बचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं।

खोजी गई गिलहरी बनी CG-PSC और व्यापमं परीक्षाओं का हिस्सा

देवपुर समर कैंप के दौरान हेमंत वर्मा द्वारा खोजी गई मालाबार जायंट स्क्विरल ने छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक और प्रशासनिक गलियारों में भी तहलका मचा दिया है। इस खोज का प्रभाव इतना व्यापक रहा कि:

  • CG-PSC समसामयिकी में मिली जगह: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CG-PSC) ने अपने करेंट अफेयर्स (समसामयिकी) पाठ्यक्रम में इस ऐतिहासिक खोज को प्रमुखता से शामिल किया।
  • व्यापमं (CGVYAPAM) परीक्षा में पूछा गया सवाल: छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित ‘उच्च न्यायालय डाटा एंट्री ऑपरेटर (High Court DEO)’ भर्ती परीक्षा में भी इस खोज और ‘मालाबार जायंट स्क्विरल’ से जुड़े प्रश्न पूछे गए।

हेमंत वर्मा की इस प्रामाणिक खोज ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि बारनवापारा और देवपुर का वन क्षेत्र जैव-विविधता (Biodiversity) के मामले में कितना समृद्ध है। इस खोज के बाद से क्षेत्र में इको-टूरिज्म और पर्यावरण अनुसंधान को एक नई दिशा मिली है।

जिले में हर्ष की लहर:
बलौदाबाजार जिले के प्रतिष्ठित नागरिकों की अनुशंसा पर जिला प्रशासन द्वारा हेमंत वर्मा को मिले इस प्रतिष्ठित सम्मान से प्रदेश के पर्यावरण प्रेमियों, वन्यजीव विशेषज्ञों और आम नागरिकों में भारी उत्साह और हर्ष का माहौल है। लोगों का मानना है कि इस सम्मान से राज्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में काम करने वाले युवाओं को नई प्रेरणा मिलेगी।