मनरेगा कर्मियों के हड़ताल से पंचायतों में काम काज ठप्प, हड़ताल बन सकता है पलायन का कारण

आशीष दास

कोंडागांव/विश्रामपुरी । पूरे प्रदेश भर में बीते 21दिनों से छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर अपने 2 सूत्रीय मांग नियमितीकरण एवं रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारित करना तथा मनरेगा कर्मियों पर सिविल सेवा नियम 1966 के साथ पंचायत कर्मी नियमावली लागू करने को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं। 21 दिनों तक चलने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल से जहां ग्राम पंचायतों में कामकाज ठप पड़ा हुआ है वही राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्य करने वाले मजदूरों को मजदूरी नहीं मिलने से उनका हाल बेहाल है, क्योंकि मनरेगा कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से मजदूरों के खाते में पैसा आना बंद हो गया। जिससे मजदूरों का गुजर बसर करना मुश्किल सा हो गया है वहीं काम का अभाव होने से मजदूर अन्य क्षेत्र में पलायन करने को विवश हो रहें है, जहाँ मनरेगा के कर्मचारियों के हड़ताल से मजदूरों के मांग पत्र, मस्टररोल, तथा कार्यों का मूल्यांकन नहीं होने से जहाँ मजदूरों के साथ साथ पंचायतों की मुश्किलें बढ़ गई। क्योंकि इस हड़ताल में रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक एवं कार्यक्रम अधिकारी कम्प्यूटर आपरेटर सहित सभी कर्मचारियों के हड़ताल के चलते जनपद पंचायत में सुनापन छाया हुआ है। वही ग्राम पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्य थम सा गया है ब्लॉक मुख्यालय विश्रामपुरी में धरने पर बैठे मनरेगा कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्रवासियों से सहयोग मांगा है। और नियमितीकरण की मांग को लेकर राज्य सरकार तक पहुंचाने की अपील की है। इस दौरान 21 वे दिन मनरेगा कर्मचारी बाइक रैली निकालकर के ग्राम पंचायतों में पहुंचकर जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से सहयोग की अपील की है तथा आम जनों से भी जन समर्थन मांगा। मनरेगा कर्मचारियों ने कहा है राज्य सरकार जब तक हमारी मांगों को पूरा नहीं करता तब तक हम अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करते रहेंगे और हमारी दांडी यात्रा जो निकल चुकी है रायपुर पहुंचने वाली है वहां पर 15000 कर्मचारी एक साथ पूरे छत्तीसगढ़ के मनरेगा कर्मचारी आंदोलन में भाग लेंगे और ज्ञापन सौपेंगे।