जामगांव (आर.), दुर्ग। शहीद डोमेश्वर साहू शासकीय महाविद्यालय, जामगांव (आर.) में प्राचार्य डॉ. शिखा अग्रवाल के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के संयोजन से प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आदिवासी समुदाय के रहन-सहन, जीवनशैली, प्रकृति प्रेम, प्रकृति पूजा तथा उनके प्रमुख त्योहारों एवं परंपराओं के बारे में अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि आदिवासी समाज की जीवनशैली प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव पर आधारित है। जंगल, जल, भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति आदिवासी समुदाय की पारंपरिक सोच आज भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रेरणा प्रदान करती है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने आदिवासी समुदाय द्वारा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे विभिन्न कार्यों को साझा करते हुए बताया कि प्रकृति को केवल संसाधन न मानकर जीवन का अभिन्न हिस्सा समझने की परंपरा आदिवासी संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शिखा अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदिवासी समुदाय अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहकर प्रकृति एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरणादायी कार्य कर रहा है। उनकी जीवनशैली हमें प्रकृति के साथ संतुलित व्यवहार करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहने की सीख देती है।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय में नव प्रवेशित विद्यार्थियों ने पौधे रोपित कर उनकी नियमित देखभाल एवं सुरक्षा करने का संकल्प लिया। हरेली तिहार के पूर्व इस कार्य से विद्यार्थियों ने स्वयं को छत्तीसगढ़ की संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश भी दिया ।
इस अवसर पर पौधारोपण अभियान को विद्यार्थियों के जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों से जोड़ने की अभिनव पहल की गई। नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने अपने जन्मदिन के अवसर पर एक पौधा लगाने और उसे संरक्षित करने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने यह संकल्प लिया कि जन्मदिन को केवल व्यक्तिगत उत्सव के रूप में मनाने के बजाय प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पौधा लगाना और उसे उपहार में देना और उसकी देखभाल करना एक सार्थक पहल होगी।
शासन द्वारा प्रति वर्ष चलने वाले एक पेड़ मां के नाम अभियान में पौधारोपण अभियान को आगामी चरणों में महाविद्यालयीन स्टाफ, पूर्व विद्यार्थी (Alumni), वर्तमान विद्यार्थी, आसपास के ग्रामीण क्षेत्र तथा गोद ग्राम को जोड़कर वृहद रूप प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण के जन-अभियान से जोड़ना है ।
कार्यक्रम का संयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी श्रीमती चेतना सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं आदिवासी संस्कृति की प्रकृति-केंद्रित परंपराओं से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आदिवासी समुदाय की प्रकृति के प्रति आस्था, प्रेम और संरक्षण की परंपराओं से प्रेरणा लेकर वर्तमान पीढ़ी भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। एक पौधा लगाना ही नहीं, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करना ही प्रकृति के प्रति सच्ची जिम्मेदारी है। कार्यक्रम को सफल बनाने में राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थियों के साथ श्री ऐश्वर्य ठाकुर , श्री उमेश मंडावी ने भी आदिवासी समुदाय के वीरो द्वारा देश के लिए किए त्याग और बलिदान को नमन किया। सभी के सहयोग से कार्यक्रम की सार्थकता को सफल बनाया गया ।







